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फरीदाबाद। सेक्टर-12, फरीदाबाद निवासी अधिवक्ता एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी द्वारा बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मृत्यु के मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को भेजे गए जनहित शिकायत/प्रतिनिधित्व पर आयोग ने शिकायत दर्ज कर ली है। आयोग द्वारा शिकायत पंजीकृत किए जाने की सूचना शिकायत संख्या के साथ एसएमएस के माध्यम से प्रेषित की गई।
एडवोकेट डॉ मोहन तिवारी ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा है कि भरत भूषण तिवारी की मृत्यु को लेकर मृतक के परिजनों एवं पुलिस प्रशासन के अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिससे घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर व्यापक जनचर्चा एवं अनेक प्रश्न उत्पन्न हुए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शी जांच ही सत्य को सामने ला सकती है तथा न्याय व्यवस्था में आमजन का विश्वास बनाए रख सकती है।
अपने प्रतिनिधित्व में उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया है कि घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों, जिनमें वीडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक एवं बैलिस्टिक रिपोर्ट,
सीसीटीवी फुटेज, वायरलेस लॉग तथा अन्य उपलब्ध अभिलेख शामिल हैं, उनके संरक्षण के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
सीसीटीवी फुटेज, वायरलेस लॉग तथा अन्य उपलब्ध अभिलेख शामिल हैं, उनके संरक्षण के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद-21 प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पुलिस कार्रवाई के दौरान विवादित परिस्थितियों में होती है तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना मानवाधिकारों की रक्षा तथा कानून के शासन की मूल आवश्यकता है।
ऐडवोकेट मोहन तिवारी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था अथवा अधिकारी को पूर्वाग्रहवश दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मामले की वास्तविक सच्चाई निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आए तथा यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की भूमिका कानून-विरुद्ध पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
उन्होंने बताया कि वे विगत कई वर्षों से जनहित, मानवाधिकार संरक्षण, विधिक जागरूकता एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करते रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस संवेदनशील मामले में उपलब्ध तथ्यों एवं विधि के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करेगा, जिससे पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने की दिशा में सकारात्मक पहल हो सके तथा न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा शिकायत दर्ज किए जाने के बाद अब यह मामला आयोग के समक्ष विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी।

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