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चंडीगढ़,10 जुलाई।
बुधवार को इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों की बिजली वितरण के लिए पैरेलल लाईसेंस देने की याचिका का तीखा विरोध करने वाले किसान, कर्मचारी, इंजीनियर्स, मजदूर व राजनीतिक दलों ने 70 प्रतिशत कंज्यूमर पैरेलल लाईसेंस देने के समर्थन का दावे को निराधार, सच्चाई के विपरित और कंज्यूमर को गुमराह करने वाला करार दिया है। इस दावे पर कड़ा विरोध जताते हुए उक्त संगठनों ने आरोप लगाया कि कुछ व्यक्तियों को मेनेज कर एचईआरसी में पैरलल लाइसेंस याचिका का समर्थन करने के लिए लाया गया था और वह बिल्कुल स्पष्ट भी दिखाई भी दे रहा था। उन्होंने सवाल किया कि व्यक्ति बड़ा नही होता, संगठन व दल बड़ा होता है , क्योंकि संगठनों और दलों की पीछे हजारों और लाखों की संख्या में लोग होते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को जिन संगठनों और दलों ने पैरेलल लाईसेंस याचिका का ठोस तर्कों के साथ डटकर विरोध किया, उनके पीछे लाखों की संख्या में किसान, कर्मचारी, इंजीनियर्स व उपभोक्ता खड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि एचईआरसी में सुनवाई के दौरान आई आपत्तियों पर विचार कर सिफारिश करने के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। ऐतराज करने वाले संगठनों ने एचईआरसी से पैरेलल लाईसेंस देने का फैसला करने से पहले उनकी आपत्तियों पर कंपनी के जबाब शेयर कर सुनवाई का अवसर देने की मांग की है।
*अनुभवहीन कंपनी को विशाल वितरण नेटवर्क सौंपना जोखिमपूर्ण*
इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के चेयरमैन देवेंद्र हुड्डा व प्रधान सुरेश राठी ने बताया कि जिस कंपनी ने पैरलल लाइसेंस लेने की याचिका दायर की है,वह जून 2025 ,मात्र एक साल पहले ही अस्तित्व में आई हुई और इसको बिजली वितरण क्षेत्र में कोई अनुभव भी नहीं है। उन्होंने बताया कि इसके पास पेड-अप (चुकता पूंजी) मात्र एक करोड़ है ( अधिकृत पूंजी 100 करोड़) जबकि कंपनी ने 4716.73 के निवेश ( 1415.02 करोड़ इक्विटी एवं 3301.71 करोड़ कर्ज) का प्रस्ताव रखा है। एचईआरसी ने 26 जून,2026 के अंतरिम आदेश में स्वयं कंपनी की वित्तीय,संचालन संबंधी तैयारी तथा प्रस्तावित निवेश करने की योग्यता पर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। ऐसी कंपनी को गुरुग्राम जैसे क्षेत्र के विशाल वितरण नेटवर्क सौंपना विधुत आपूर्ति की विश्वसनीयता, सुरक्षा और उपभोक्ता सेवाओं के लिए जोखिमपूर्ण काम होगा। इसलिए याचिका को खारिज किया जाए।
*डीएचबीवीएन द्वारा 4662 करोड़ निवेश के बाद पैरेलल लाईसेंस क्यों?*
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि पिछले वर्षों में डीएचबीवीएन ने पैरलल लाइसेंस की याचिका वाले क्षेत्र गुरुग्राम में स्मार्ट सिटी योजना के तहत 1068 करोड़ और आरडीएसएस सिटी योजना के तहत 3584 करोड़ का निवेश किया है। इसका परिणाम है कि एटीएंडसी हानियां वित्त वर्ष 2023-24 के 11.35 से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 10.26 रह गई है और वित्तीय कलेक्शन दक्षता 100 प्रतिशत से ज्यादा हो गई है। बिजली आपूर्ति भी बेहतर हुई है। इसलिए यह सब हो रहा है तो डीएचबीवीएन के पैरलल लाइसेंस देने की आवश्यकता नहीं है।
*पैरलल लाइसेंस निजीकरण का पैकेज*
उन्होंने कहा कि यह बिजली डिस्कॉम का निजीकरण का पूरा पैकेज है, जिसको समझने की आवश्यकता है। डिस्कॉम में पैरलल लाइसेंस के लिए स्मार्ट मीटरिंग की आवश्यक है। इसीलिए ठीक चल रहे मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं और पैरलल लाइसेंस लेने वाली कंपनी को बिलों की वसूली में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए स्मार्ट मीटर को प्रीपेड किया जा रहा है। इसके लिए सभी कंज्यूमर के मीटर बदलने के लिए लगभग 8100 करोड़ खर्च किए जाएंगे। यहां सभी वित्तीय भार भी डीएचबीवीएन पर ही पड़ेगा और इसका फायदा निजी कंपनी उठाएगी। उन्होंने बताया कि निजी कंपनी के हितों को ध्यान में रखते हुए 15 अगस्त को कृषि उपभोक्ताओं के लिए एग्री डिस्कॉम को अलग किया जा रहा है। ताकि प्राईवेट कंपनी को किसानों को बिजली आपूर्ति न करना पड़े, क्योंकि किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है। एग्री डिस्कॉम 5427 करोड़ के घाटे से शुरू हो रही है। सरकार की आर्थिक स्पोर्ट के बिना कर्मचारियों को वेतन के भी लाले पड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन अगर किसानों, कर्मचारियों, इंजीनियर्स व राजनैतिक दलों के विरोध के बावजूद इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को पैरलल लाइसेंस दे देता है तो भी उसका डीएचबीवीएन से उसके वर्तमान नेटवर्क को इस्तेमाल करने के लिए एमओयू करना लाजिमी है और डीएचबीवीएन इसके लिए बाध्यकारी नहीं है। दूसरा विकल्प यह है कि इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड अपना समानांतर नेटवर्क खड़ा करें,यह इतना आसान भी नहीं है। अगर ऐसा होता है तो इसके लिए प्रयाप्त स्पेस भी नहीं है और इससे एक्सीडेंट में भी बढ़ोतरी होगी। जिसमें सैकड़ों कर्मचारियों की जान जा सकती है।
*डीएचबीवीएन को रेवेन्यू का भारी नुकसान और नई कंपनी किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति नही करेंगी।*
उन्होंने कहा कि डीएचबीवीएन के कुल राजस्व का लगभग एक-तिहाई राजस्व गुरुग्राम से ही प्राप्त होता है। इस क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपने के बाद राजस्व का भारी नुकसान होगा,जो निगम के आर्थिक स्थिति को बिगाड़ने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि प्राइवेट कंपनी लाख दावे करे कि हम सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करेंगे, लेकिन वह औद्योगिक क्षेत्र,मॉल, कामर्शियल और शहरी क्षेत्रों के पास इलाकों में ही बिजली आपूर्ति करेंगे। घरेलू ग्रामीण क्षेत्रों, किसानों व गरीब उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति नहीं करेंगे। यहां बिजली आपूर्ति का काम डीएचबीवीएन करेंगी,जो वहन नहीं कर सकेंगी।
क्योंकि सरकार के लिए बिजली एक सेवा है और प्राइवेट कंपनी के लिए व्यापार है और कोई भी व्यापारी बिना मुनाफा कमाए कारोबार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस फैसले से बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर के सेवाएं भी प्रभावित होगी, छंटनी की तलवार लटक जाएगी या वहां से ट्रांसफर किया जाएगा।जो बिजली कानून,2003 का उल्लघंन है, जिसको बर्बाद नही किया जा सकता है।


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