HEADLINES


More

गुरुग्राम-फरीदाबाद में अब मिक्स्ड लैंड यूज में बदल सकेंगे अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 12 July 2026 0 comments
pramod goyal
Saved under : , ,
//# Adsense Code Here #//

 चंडीगढ़ : हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में तेजी से बदलते शहरी परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए अफोर्डेबल हाउसिंग नीति में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। अब मेट्रो नेटवर्क और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र में स्थित अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत मिक्स्ड लैंड यूज कॉलोनियों में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ जैसे शहरों में चल रही परियोजनाओं को तत्काल लाभ मिलने की संभावना है


, जबकि भविष्य में मेट्रो विस्तार वाले क्षेत्रों में भी यह नीति विकास की नई संभावनाएं खोलेगी।


13 वर्ष पुरानी नीति में बड़ा बदलाव
19 अगस्त 2013 की अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग नीति के तहत ऐसे लाइसेंसों को किसी अन्य श्रेणी में परिवर्तित करने की अनुमति नहीं थी। सरकार के नए निर्णय के बाद यह प्रतिबंध केवल ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) क्षेत्र की परियोजनाओं के लिए आंशिक रूप से हटाया गया है। यानी केवल मेट्रो एवं ट्रांजिट कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों की अफोर्डेबल हाउसिंग कॉलोनियां ही मिक्स्ड लैंड यूज श्रेणी में परिवर्तित की जा सकेंगी।

मेट्रो शहरों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
इस नीति परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव उन शहरों में देखने को मिलेगा जहां मेट्रो सेवा पहले से उपलब्ध है या विस्तार की योजना पर काम चल रहा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ की अनेक परियोजनाएं इस फैसले का सीधा लाभ उठा सकेंगी। इसके अलावा बल्लभगढ़-पलवल तथा दिल्ली-कुंडली मेट्रो विस्तार के पूरा होने के बाद इन कॉरिडोर के आसपास विकसित होने वाली नई परियोजनाओं के लिए भी यह विकल्प उपलब्ध रहेगा।

डेवलपर्स को मिलेगी नई कारोबारी आजादी
नई व्यवस्था के तहत डेवलपर्स परियोजनाओं की वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए लेआउट तैयार कर सकेंगे। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि मिक्स्ड लैंड यूज कॉलोनियों में न्यूनतम 7.5 प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ेगी और निवेशकों के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।

फ्लैट खरीदारों के हित रहेंगे पूरी तरह सुरक्षित
सरकार ने नीति में बदलाव के साथ मौजूदा फ्लैट खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। जिन परियोजनाओं में तीसरे पक्ष के अधिकार बन चुके हैं, वहां लाइसेंस परिवर्तन तभी संभव होगा जब सभी आवंटी अपनी लिखित सहमति देंगे। वहीं जिन परियोजनाओं में अभी तक ऐसे अधिकार नहीं बने हैं और जो हरेरा में पंजीकृत नहीं हैं, वहां डेवलपर को शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। इससे किसी भी खरीदार के हित प्रभावित नहीं होंगे।

No comments :

Leave a Reply