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गुरुग्राम,22 जुलाई।
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संधर्ष मंच के बेनर तले बुधवार को सुखराली सामुदायिक केंद्र इंजीनियरों, बिजली कर्मचारियों, संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों तथा बिजली उपभोक्ताओं की एक विशाल संयुक्त रैली का आयोजन किया गया। जिसमें गुरुग्राम एवं नूंह के लिए प्रस्तावित समानांतर वितरण (पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन) लाइसेंस का जोरदार विरोध किया गया। रैली में हजारों कर्मचारियों, किसानों एवं उपभोक्ताओं ने भाग लेकर चेतावनी दी कि यदि निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस दिया गया तो पूरे हरियाणा में व्यापक जन आंदोलन चलाया जाएगा। रैली के उपरांत हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग को संबोधित ज्ञापन अधिक्षण अभियंता आपरेशन सर्कल -1 व 2 को सौंप कर समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन को तत्काल निरस्त करने तथा आयोग द्वारा गठित तथाकथित विशेषज्ञ समिति को भंग करने की मांग की गई।
रैली में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे, इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा,ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी, एचएसईबी वर्कर यूनियन के मनोज सैनी, पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन (एससी बीसी / एसटी) के महासचिव राजेश सिरोही, संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुरेश कौथ व धर्मपाल बढाला,जेएमएस की प्रधान ऊषा सरोहा, सीटू की नेता मूर्ति, एसकेएस के सचिव सुशील शर्मा व महासंघ के नेता रविंद्र यादव आदि पहुंचे और संबोधित किया। सम्मेलन की अध्यक्षता दलबीर मोर, अमरजीत जाखड़, बिजेंद्र बराड़ व रविन्द्र घणघस ने की।
रैली को संबोधित करते हुए के चेयरमैन इंजी. शैलेन्द्र दुबे व इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि बिजली का निजीकरण किसानों, गरीब उपभोक्ताओं और आम जनता के हितों के विरुद्ध है। निजीकरण के बाद बिजली महंगी हो जाएगी और किसानों व घरेलू उपभोक्ताओं की पहुंच से बाहर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है, इसे निजी मुनाफे का साधन नहीं बनाया जा सकता। लांबा ने कहा कि विद्युत अधिनियम के अनुसार समानांतर लाइसेंसधारी को अपना स्वतंत्र वितरण नेटवर्क स्थापित करना होगा। लगभग ₹4700 करोड़ के प्रस्तावित निवेश से गुरुग्राम एवं नूंह जैसे विशाल क्षेत्रों में नया नेटवर्क बनाना संभव नहीं है, जबकि सरकारी वि
तरण निगम गुरुग्राम में पहले ही लगभग ₹ 4700 करोड़ का निवेश कर चुके हैं। सार्वजनिक धन से तैयार नेटवर्क को निजी लाभ के लिए सौंपना जनहित के विरुद्ध है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुरेश कौथ व धर्मपाल बढाला ने कहा किसान किसी भी कीमत पर पैरलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम व स्मार्ट मीटरिंग को के फैसलों को लागू नहीं होने देंगे।
तरण निगम गुरुग्राम में पहले ही लगभग ₹ 4700 करोड़ का निवेश कर चुके हैं। सार्वजनिक धन से तैयार नेटवर्क को निजी लाभ के लिए सौंपना जनहित के विरुद्ध है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता सुरेश कौथ व धर्मपाल बढाला ने कहा किसान किसी भी कीमत पर पैरलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम व स्मार्ट मीटरिंग को के फैसलों को लागू नहीं होने देंगे।
एएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी व एचएसईबी वर्कर यूनियन के आडिटर मनोज सैनी
ने प्रश्न उठाया कि प्रस्तावित निजी कंपनी इलेवन पावर का बिजली वितरण का क्या अनुभव है ? और क्या वह गुरुग्राम तथा विकसित हो रहे औद्योगिक क्षेत्र नूंह जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में वितरण का संचालन करने की क्षमता रखती है? उन्होंने कहा कि उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों को निजी कंपनियों को सौंपने से सरकारी वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर होंगे, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था प्रभावित होगी और अंततः बिजली दरों का बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
रैली को रविन्द्र घणघस, बिजेंद्र बराड़, शब्बीर अहमद गनी, विकास नेहरा ने सहित अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। प्रतिभागियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि समानांतर वितरण लाइसेंस सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था को कमजोर करेगा, किसानों एवं गरीब उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी करेगा तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता संधर्ष मंच ने रेगुलेटरी कमीशन से आग्रह किया कि वह व्यापक जनहित, पारदर्शिता एवं निष्पक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन को निरस्त करे। संयुक्त मोर्चा ने दोहराया कि सार्वजनिक बिजली क्षेत्र, किसानों एवं उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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