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आज मैं इतना विचलित हो उठा कि मौन नहीं रहा गया जो आज कल देश में घटित हो रहा है, वह लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहनीय है। इस सभी के लिए हम शासन व प्रशासन को दोषी क्यों ना माने। आखिर कर्तव्य और जिम्मेदारी व उत्तरदायित्व किसका है . देश के युवा पीढ़ी के साथ जो हो रहा है इसके लिए पूरे देश के युवा पीढ़ी के अन्दर एक आक्रोश की ज्वाला फैल चुकी है जो इस महान देश के इतिहास वर्तमान और भविष्य की सामाजिक स्थिति को कलंकित करने का काम किया जा रहा है। एक केन्द्रीय मंत्री भारत सरकार की रात को प्रैस कान्फ्रेंस सुनीं तो मेरी तरह पूरा-पूरा देश आश्चर्य चकित रह गया। बजाय व्यवस्था में गलतीयों की गुंजाइश नहीं रहें ऐसा ना हो भविष्य में युवाओं के अथवा किसी के साथ भी हिंसकता के अत्याचार ना हो भविष्य में ऐसी संवेदना के साथ कुछ विश्वास दिलाया होता रोड मैप तैयार किया जायेगा मंत्री महोदय तो बता रहे थे कि पिछले काल में जगह जगह अनेकों राज्यो में अन्य पार्टियों की सरकारो में हुआ है तो हम भी कर सकते हैं सरासर वह अनियमिताओं को न्यायोचित ठहराते हुए नजर आए इससे इनकी मानसिकता को समझने की आवश्यकता है पुलिस बल तैनात कर बच्चों पर हिसंक व्यवहार बिना किसी आदेश के तो हुआ नहीं है महिलाओं के चीर-हरण करवाया सभी घायल अवस्था में जब वीडियो देश की सर्वोच्च अदालत में दिखाया गया तो देशभर के युवा पीढ़ी को कोकरोच कहने वाले न्यायालय ने कहा हमारे पास फालतू समय नहीं है लगता है लोकतंत्र के चारों स्तंभों को ही सुधार की आवश्यकता है वो शासन, प्रशासन, प्रैस मिडिया, न्यायापालिका, कोई भी राष्ट्र के नागरिकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जिम्मेदारी नहीं निभा रहा और इसके मूल में है स्वार्थ पूर्ति हेतु राजनीतिक भ्रष्टाचार सभी एक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं किसान व मजदूर सभी मेहनतकश लोगों के दुश्मन बन गए हैं फिर युवा पीढ़ी हो वरिष्ठ पीढ़ी हो महिलाएं हों सभी लोग मुठ्ठी भर लोगों के पूंजी वादी व्यवस्था के शोषण, उत्पीड़न के शिकार हो, हमारे टैक्स से देश का विकास होता है परन्तु विकास हो रहा है भ्रष्टाचारियों का पूंजीपतियों से पैसा लेकर अपनी अपनी हैसियत के मुताबिक सभी पार्टियों को चुनाव लड़ेंगी तो फायदा तो उसका करेंगी सरकारें जिन्से पैसे लिए हैं हमारी वोट तो जाती धर्म सम्प्रदाय क्षेत्रों के नाम हम लोग अंधे होकर पांच वर्ष तक अपना शोषण अधिकार देने बात सड़कों पर प्रदर्शन कर के लाठी गोली खा कर अपनी जान दे रहे हैं फिर दोषी कोन वो या हम ???????? अभी भी सक्रिय हो जाना चाहिए सभी तरह के प्रयोग कर कर देख लिए युवाओं को आगे देश बाग डोर सोपंने की तैयारियां शुरू करो जो किसान मजदूरो मेहनतकश लोगों के बच्चे हों उनको जायज़ चुनाव खर्च के लिए नोट और वोट दोनों से अभी से 2029 की तैयारियां जोरों शोरों से शुरू करो फिर संसद और विधानसभाओं में कानून देश के नागरिकों के हितों के बनेंगे और जबाबदेही तथा उत्तरदायित्व भी देश में सभी संस्थाओं की तय हो सकती है वर्तमान अराजकता का समाधान तो मुझे यही सही लगता है परन्तु हमारे जैसे लोगों की आप लोग कहां मानते हो
- सूर्य देव त्यागी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, हिंद मजदूर सभा

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