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हरियाणा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान 28 लाख 687 मतदाता बीएलओ को नहीं मिले हैं। इनका सत्यापन नहीं हो सका है।
निर्वाचन विभाग ने इन सभी को एएसडी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट) श्रेणी में शामिल कर दिया है। ऐसे मतदाताओं के नाम 21 जुलाई को जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, उन्हें अपना नाम दोबारा जुड़वाने का मौका मिलेगा। यदि दावा-आपत्ति की अवधि में भी कोई आवेदन नहीं किया गया, तो अंतिम मतदाता सूची से उनके नाम हटा दिए जाएंगे।
सबसे अधिक ऐसे मतदाता पंचकूला में मिले हैं, जहां 22.94 प्रतिशत फॉर्म एकत्र नहीं हो सके। इसके बाद फरीदाबाद (21 प्रतिशत), गुरुग्राम (20.15 प्रतिशत), सोनीपत (16.18 प्रतिशत), पानीपत (15.23 प्रतिशत) और यमुनानगर (15.17 प्रतिशत) का स्थान है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) हरि
याणा के अनुसार, इन मतदाताओं के पते पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने तीन बार जाकर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसलिए उन्हें एएसडी सूची में शामिल किया गया है।
निर्वाचन विभाग अब यह एएसडी सूची जिलेवार राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के साथ भी साझा करेगा, ताकि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले यदि किसी का नाम गलती से छूट गया हो तो उसे सुधारा जा सके। यह सूची सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हरियाणा की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी। सूची ईपीआईसी (एपिक) सर्च सुविधा के साथ होगी, जिससे मतदाता अपने एपिक नंबर के जरिए आसानी से यह देख सकेंगे कि उनका नाम सूची में है या नहीं। इसके अलावा यह सूची पंचायत भवन, नगर निगम, बीडीपीओ कार्यालय और अन्य सरकारी कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा होगी।
याणा के अनुसार, इन मतदाताओं के पते पर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने तीन बार जाकर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वे वहां नहीं मिले। इसलिए उन्हें एएसडी सूची में शामिल किया गया है।
निर्वाचन विभाग अब यह एएसडी सूची जिलेवार राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के साथ भी साझा करेगा, ताकि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने से पहले यदि किसी का नाम गलती से छूट गया हो तो उसे सुधारा जा सके। यह सूची सभी जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी, हरियाणा की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएगी। सूची ईपीआईसी (एपिक) सर्च सुविधा के साथ होगी, जिससे मतदाता अपने एपिक नंबर के जरिए आसानी से यह देख सकेंगे कि उनका नाम सूची में है या नहीं। इसके अलावा यह सूची पंचायत भवन, नगर निगम, बीडीपीओ कार्यालय और अन्य सरकारी कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा होगी।

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