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आरटीई (RTE) नियम के तहत
अलॉट किए गए पात्र छात्रों को प्राइवेट स्कूलों द्वारा दाखिला देना अनिवार्य किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी जनवरी 2026 के अपने आदेश में कहा है कि RTE के तहत राज्य सरकारों को पात्र छात्रों को दाखिला दिलवाना चाहिए और प्राइवेट स्कूलों को भी अपने स्कूल में गरीब बच्चों को दाखिला देना चाहिए।
हरियाणा अभिभावक एकता मंच ने कहा है कि हरियाणा सरकार गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला दिलाने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा
ने कहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने गत वर्ष सीबीएसई के 28 स्कूलों व इस वर्ष 44 स्कूलों द्वारा पात्र छात्रों को दाखिला न देने की सूची व शिकायत शिक्षा निदेशक को भेजकर दोषी स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की थी लेकिन आज तक इन स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है। सरकार पूरी तरह से इन प्राइवेट स्कूलों के आगे नतमस्तक है। मंच के प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस बिरदी ने कहा है कि इस वर्ष फरीदाबाद में कुल 1,519 बच्चों का चयन आरटीआई के तहत दाखिला देने के लिए किया गया था और उनको स्कूल अलोट कर दिए थे इनमें से 767 बच्चों को ही हरियाणा बोर्ड के निजी स्कूलों ने दाखिला दिया वाकी 752 बच्चों को निजी स्कूलों ने दाखिला देने से मना कर दिया जिनमें सीबीएसई स्कूलों की संख्या ज्यादा है। एडवोकेट बिरदी ने कहा है कि हरियाणा सरकार ने और निजी स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के आदेश की अवमानना की है
मंच इसको आधार मानकर मुख्य सचिव,शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक हरियाणा के खिलाफ पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का केस दायर करेगा जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी व दाखिला देने से मना करने वाले स्कूलों को पार्टी बनाया जायेगा।

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