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फरीदाबाद,8 जून।
जनवादी महिला समिति और मजदूर संगठन (सीटू) ने एनआईटी-3 स्थित नेहरू कॉलोनी में प्रशासन और नगर निगम द्वारा बड़े पैमाने पर की गई तोड़-फोड़ की कार्रवाई की तीखे शब्दों में निंदा की है। दोनों संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर इस पूरी कार्रवाई को 'अमानवीय, जनविरोधी और क्रूर' करार दिया है।
जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष सविता, जिला संयोजक कमलेश, सीटू के राज्य महासचिव जयभगवान, जिला सचिव वीरेंद्र डंगवाल, अध्यक्ष निरंतर पराशर और कोषाध्यक्ष सुधा ने नेहरू कॉलोनी का दौरा किया और पीड़ित नागरिकों से मुलाकात की।
जनवादी महिला समिति की राज्य अध्यक्ष सविता ने
कहा कि एक तरफ फरीदाबाद और पूरा एनसीआर का क्षेत्र इस समय करीब 45 डिग्री सेल्सियस की जानलेवा गर्मी और लू की चपेट में है, वहीं दूसरी ओर सरकार संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए 300 से अधिक मकानों को मलबे में तब्दील कर चुकी है। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और बुजुर्गों को बिना किसी वैकल्पिक आश्रय के सीधे सड़कों पर फेंक दिया गया। इसका परिणाम यह है कि एक गर्भवती महिला की डिलीवरी खुली सड़क पर हुई और उसके नवजात बच्चे की मृत्यु हो गई। इस सबसे क्षेत्र में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बुनियादी ढांचे के विकास या गुरुग्राम-फरीदाबाद-नोएडा नमो भारत रैपिड रेल (RRTS) जैसी परियोजनाओं के विरोधी नहीं हैं। लेकिन विकास के नाम पर पिछले 40-50 वर्षों से रह रहे मेहनतकशों, मजदूरों और गरीबों के आशियाने उजाड़ देना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। प्रशासन ने बिना किसी पूर्व ठोस पुनर्वास नीति और बिना मुआवजा दिए जल्दबाजी में यह 'पीला पंजा' चलाया है। नेताओं ने कहा कि पुनर्वास के बिना 'विकास' सिर्फ छलावा है। जनवादी महिला समिति और सीटू ने प्रशासन द्वारा इलाके में धारा 163 लगाने, बस्तियों की बैरिकेडिंग करने और पीड़ितों के पक्ष में शांतिपूर्ण पंचायत व धरना दे रहे सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं को जबरन हटाने की पुलिसिया कार्रवाई की भी निन्दा की है। संगठनों का कहना है कि अपनी छत छिन जाने के बाद शांतिपूर्ण तरीके से न्याय मांगना जनता का संवैधानिक अधिकार है, जिसे पुलिस बल के दम पर कुचला जा रहा है। सीटू और जनवादी महिला समिति ने मांग की है कि बेघर हुए सभी परिवारों को तत्काल रहने के लिए अस्थाई शेल्टर होम, शुद्ध पेयजल, भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। नेहरू कॉलोनी से उजाड़े गए प्रत्येक परिवार को उचित मुआवजा और पास ही के क्षेत्र में जमीन या पक्का मकान देकर पुनर्वासित किया जाए। जब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक क्षेत्र में आगे की किसी भी तोड़फोड़ की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए। प्रभावित जनता पर दर्ज किए जा रहे मुकदमों को वापस लिया जाए और उनके लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के अधिकार को बहाल किया जाए। सीटू और जनवादी महिला समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और फरीदाबाद नगर निगम प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए, तो इसके खिलाफ सभी जनवादी ताकतों को एकजुट कर व्यापक जन-आंदोलन छेड़ा जाएगा।

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