HEADLINES


More

ह्रदय घात से बचने के लिए करें उष्ट्रासन ‎- डॉ. अश्वनी गौड़

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 20 June 2026 0 comments
pramod goyal
//# Adsense Code Here #//


 ‎स्थानीय  एकात्म पार्क सेक्टर 21D मैं हज़ारो लोगों को उष्ट्रासन करवाते हुए श्री हरि देव अंतर्राष्ट्रीय सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ अश्वनी गौड ने बताया कि इस आसन में शरीर ऊंट की तरह टेढ़ा-मेढा होने के कारण इसका नाम उष्ट्रासन रखा गया है। आमतौर पर जीवन में लोग आगे की ओर झुककर काम करने के आदी हैं। इससे रीढ़ की स्वाभाविक स्थिति बिगड़ जाती है। इस विकृति को सुधारने के लिए यह आसन रामबाण का काम करता है। रीढ़ की सारी न्यूनताएँ-टेढापन, स्लिप डिस्क, स्पोण्डेलाइटिस आदि समाप्त होती है। जंघा, उदर, छाती के अंतरंग भाग खिंचते हैं जिससे वे स्वस्थ रहते हैं। अतिरिक्त चर्बी घटती है। फेफड़े श्वास भरने से पीछे की ओर जब मुड़ते हैं तो उनमें लचीलापन आता है तथा श्वास रोकने की क्षमता बढ़ती है। शारीरिक विकास, कद का बढ़ना आदि में यह आसन अति उपयोगी है। अतः किशोर व किशोरियों के लिए यह बड़ा हितकारी है। महिलाओं के मासिक धर्म की समस्त अनियमितताएँ दूर होती हैं। हृदय पुष्ट होता है। उसके रोग ठीक होते हैं। हृदयघात से बचने के लिए इस आसन को रोज करना चाहिए।

‎वज्रासन में बैठें। घुटनों के बल पर खड़े हो जाएँ। पीछे से दोनों पैर समानान्तर हों। पंजे जमीन पर लेटे हुए हों। दोनों हाथों को कमर पर इस प्रकार रखें कि अंगूठे रीढ़ पर मिल जाएँ। चारों अंगुलियां आगे की ओर हों। श्वास भरते हुए गर्दन को धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएँ। रीढ़ पूरी तरह मुड़ने पर हथेलियाँ तलवों पर रख दें। श्वास स्वाभाविक। धीरे-धीरे पूर्व स्थिति में आना है। जल्दी करने से चक्कर आने की संभावना रहती है।
‎उन्होंने लोगों को टिप्स देते हुए यह भी बताया कि 10-15 बार लम्बी गहरी श्वासें खुली हवा में लेनी चाहिए उससे फेफड़े सम्बन्धी रोग नहीं होते। प्रतिदिन शरीर की मांग के अनुसार 2-5 लीटर जल अवश्य पीना चाहिए।

‎श्री हरि देव अंतर्राष्ट्रीय सेवा संघ के तत्वाधान में आयोजित एक दिवसीय योग शिविर में 12वाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य पर उन्होनें बताया कि महर्षि पतंजलि का जन्म दूसरी शताब्दी में गोनिया में हुआ और ये काशी में नागकूप पर बस गए। यह राजा भोज के काल में चिकित्सक थे। महर्षि पतंजलि योगसूत्र के रचनाकार है उन्होंने चित्त शुद्धी के लिए योग, वाणी शुद्धी के लिए व्याकरण (महाभाष्य) और शरीर शुद्धी के लिए चरक संहिता वैद्यक शास्त्र की रचना की। उसी श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने यू. एन. ओ में योग की बात को रखा और 177 देशों ने बात मानी और आज 250 से अधिक देश योग दिवस मना रहे हैं। हमारे देश ने योग, भाषा के लिए व्याकरण और बिमारी भगाने के लिए चरक सहिंता पूरे विश्व को दी ।
‎इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारणी सदस्य एवं राष्ट्रीय सदभाव प्रमुख श्री अशोक बेरी जी ने हजारों लोगों को उदबोधन देते हुए कहा कि साधारणतः लोग शरीर को बाहर से संवारते हैं परन्तु योग अन्दर से शरीर को मांझता है । अन्दर से मालिश करता है मन को सुन्दर बनाता है। इस भागदौड़ वाले जीवन में मन शक्ति एवं प्राणशक्ति को योग विधि से सीखना अति आवश्यक है। वे बतौर मुख्य वक्ता योग साधना अनादि काल से गुरु शिष्य परम्परा से चली आ रही है। यह एक ऐसी साधना पद्धति है जिससे अध्यात्म की उच्च अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है । मानव जीवन को सुखी बनाने के लिए योग सर्वोतम मार्ग है।
‎इससे पूर्व RSS के अखिल भारतीय गीत विद्या प्रमुख ने गीत गान के द्वारा हजारों योग साधकों को आध्यात्म की जानकारी दी । इस अवसर पर उमेश जी प्रान्त संगठन मंत्री क्रीड़ा भारती मेरठ प्रान्त भी उपस्थित रहे।इस अवसर पर मेरठ से आए संगठन के प्रदेश संरक्षक श्री नन्द किशोर जी ने सभी राष्ट्रीय अधिकारियों का परिचय कराया एवं योग के विषय पर प्रकाश डाला। अंत में माननीय महानगर संघ चालक RSS श्री संजय अरोड़ा जी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हजारों लोगों को प्राणायाम कराया एवम आए हुए अतिथियों का  योग साधकों, योग शिक्षकों , प्रतिभागियों एवम कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया , तत्पश्चात कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
‎इस अवसर पर गुरूग्राम से आए प्रांत सम्पर्क प्रमुख RSS प्रदीप जी, सह प्रान्त बौद्धिक प्रमुख ऋषिपाल जी अधिवक्ता, माननीय सहसंघचालक श्री अशोक जी,मेरठ से आए रॉयल कॉलेज के संस्थापक के पी सिंह सभी ने मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथियों के साथ भारत माता के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित कर के कार्यक्रम का शुभारंभ कराया।
‎इस अवसर पर श्री सुरेंद्र जांगड़ा, सतीश गौतम, मनीष सिंह, वीरेंद्र सिंह रावत धर्मवीर सिंह बिधूड़ी , मनीषा चौधरी, मोनिका रावत, प्रेमलता चिकारा, चंचल सोनी, कुसुम शर्मा, वीना सिंह , गीता कौशिक, संगीता नेगी, कुसुम बिष्ट, हरिदर्शन, महेश शर्मा, अवतार अहलावत, जोगेन्द्र हुड्डा, जगदीश अधाना प्रधान RWA ने विशेष रूप से भाग लिया।

‎क्षेत्र के लोगो ने श्री हरि देव अंतर्राष्ट्रीय सेवा संघ के इस आयोजन की भरपूर सराहना की।

No comments :

Leave a Reply