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फरीदाबाद,15 जून।
नेहरू कालोनी के घरों व धाार्मिक स्थालों में की गई गैर कानूनी तोड़-फोड़ के खिलाफ एवं दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करवाने और टुटे हुए घरों का मुआवजा दिलवाने व विस्थापित लोगों के पुर्नवास के लिए नागरिकों ने नगर निगम कमिश्नर के कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। यह आयोजन नेहरू कालोनी बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में किया गया। धरने की अध्यक्षता सुधा पाल, बिजेन्द्र सिंह और नवल सिंह ने संयुक्त रूप से की।
प्रदर्शन को प्रमुख रूप से सीटू प्रदेश महासचिव जयभगवान, जिला सचिव वीरेंद्र डंगवाल, जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष सविता व
नेहरू कालोनी के पीड़ितों ने संबोधित किया। आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी महेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र एवं कांग्रेस के नेता विवेक प्रताप सिंह भी पहुंचे और पीड़ितों को संबोधित किया और आंदोलन में हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया। संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम के ज्वाइंट कमिश्नर से मिलकर एक मांग पत्र मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया।
वक्ताओं ने कहा कि फरीदाबाद नगर निगम व जिला प्रशासन द्वारा 60 साल से भी अधिक समय से बसी नेहरू कालोनी में सैंकड़ों घरों व धार्मिक उपासना स्थलों पर बुल्डोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्यवाही 29 व 30 मई 2026 की रात को उस समय की गई, जब रात को लोग अपने घरों में सो रहे थे। जिन घरों पर बुल्डोजर चला उनके मालिकों को घर खाली करने के लिए पहले कोई नोटिस तक नहीं दिए गए। इस कालोनी में रहने वाले लोगों के राशन कार्ड हैं, आधार कार्ड हैं, बिजली के मीटर हैं, वोटर कार्ड हैं। फिर क्यों इस प्रकार की कार्यवाही की जा रही है।
उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां कानून का राज है। देश या प्रदेश सरकार यदि किसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण करती है तो उसके लिए भी एक तय प्रक्रिया है। लेकिन फरीदाबाद में नेहरू कालोनी पर जो बुल्डोजर चलाकर मकानों व धार्मिक स्थलों को धवस्त किया जा रहा है, वहां इस प्रकार के कानूनी नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। कालोनी के सैंकड़ों घरों को 29 व 30 मई 2026 की रात को तोड़ा गया लेकिन नोटिस 2 जून 2026 को कमिश्नर, नगर निगम फरीदाबाद की ओर से भेजा गया। यह बेहद चौंकाने वाली बात है। उन्होंने कहा कि लोग शंका जाता रहे हैं कि यह सब सताधारी पार्टी के किन्हीं खास नेताओं, प्रापर्टी डिलरों को यह बेशकीमती जमीन उपलब्ध करवाने के लिए तो नहीं की जा रही हैं। सभी ने एक स्वर में इसकी निन्दा की व जब तक मांगे पूरी नहीं होती, तब तक हर रोज नगर निगम के कमिश्नर के कार्यालय पर धरना देने का निर्णय लिया गया।

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