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चंडीगढ़,9 जून।
इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) ने कृषि फीडरों और कृषि उपभोक्ताओं के लिए एक अलग “हरियाणा एग्री डिस्कॉम” बनाने की अधिसूचना की कड़ी निन्दा की है। ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि हरियाणा सरकार का यह कोई अलग-थलग निर्णय नहीं है। बिजली वितरण के विखंडन और निजीकरण को बढ़ावा देने के ऐसे प्रयास अन्य राज्यों में भी दिखाई दे रहे हैं। हरियाणा सरकार का यह कदम केंद्र सरकार के बिजली वितरण के निजीकरण के व्यापक एजेंडे का ही हिस्सा है। उन्होंने बताया कि विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025, जो एक ही क्षेत्र में सांझा अवसंरचना का उपयोग करते हुए अनेक वितरण लाइसेंसधारियों को संचालन की अनुमति देने का प्रयास करता है, पहले ही बिजली कर्मचारियों, किसानों और ट्रेड यूनियनों के देशव्यापी भारी विरोध का सामना कर चुका है। इसी व्यापक प्रतिरोध के कारण सरकार को इस विधेयक को फिलहाल स्थगित रखना पड़ा। उन्होंने बताया कि वर्तमान अधिसूचना राज्य स्तर पर उसी निजीकरण एजेंडे को पिछले दरवाजे से लागू करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर बिना बिजली निजीकरण के लिए समानान्तर लाइसेंस प्रणाली लागू नहीं हो सकती। इसलिए ठीक-ठाक चल रहे बिजली मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 5427 करोड़ के कर्ज से शुरू हो रही एग्रीकल्चर डिस्कॉम व उसमें जाने वाले कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा इस सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सब्सिडी और क्रास सब्सिडी खत्म होने के बाद बिजली किसानों की पहुंच से बाहर हो जाएंगी।
ईईएफआई के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश राठी ने बताया कि हरियाणा में लगभग 7.17 लाख सब्सिडी प्राप्त कृषि उपभोक्ताओं, 2,54,325 वितरण ट्रांसफार्मरों, 2,697 कृषि 11 केवी फीडरों, 166.82 करोड़ रुपये की बकाया राशि तथा भारी देनदारियों को एक अलग इकाई में स्थानांतरित करके हरियाणा सरकार जानबूझकर भारी सब्सिडी वाले कृषि क्षेत्र को अलग कर रही है। इसका अंतिम परिणाम किसानों के लिए बिजली दरों में वृद्धि, आपूर्ति की अनिश्चितता तथा बिजली की उपलब्धता में कमी के रूप में सामने आएगा। यह कदम मौजूदा बिजली वितरण निगमों को उनके घाटे वाले ग्रामीण और कृषि व्यवसाय से मुक्त करके निजी भागीदारी के लिए अधिक आकर्षक बना
ने की स्पष्ट तैयारी भी है।
ने की स्पष्ट तैयारी भी है।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर कृषि फीडर पृथक्करण पहले ही किया जा चुका है, जो कृषि आपूर्ति को मुख्य डिस्कॉम से अलग करने की एक सुनियोजित प्रक्रिया का हिस्सा है। हरियाणा अब इसी एजेंडे को और अधिक आक्रामक रूप में आगे बढ़ाते हुए एक पूर्णतः अलग एग्री डिस्कॉम बनाने जा रहा है। इस नई घाटे वाली इकाई में 3,100 से 3,600 कर्मचारियों को स्थानांतरित करने का प्रस्ताव है, जबकि मूल कंपनियों में उनके पद समाप्त किए जाने की योजना है। इससे कर्मचारियों में विभाजन होगा, सामूहिक सौदेबाजी की शक्ति कमजोर होगी तथा रोजगार असुरक्षा बढ़ेगी।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा
ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज़ फेडरेशन ऑफ इंडिया लगातार विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 तथा बिजली वितरण के निजीकरण के हर प्रयास का विरोध करता रहा है, चाहे वह केंद्र सरकार द्वारा हो या राज्य सरकारों द्वारा। किसान संगठनों और अन्य ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर ईईएफआई इन जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्षों, प्रदर्शनों और राष्ट्रव्यापी आंदोलनों का हिस्सा रहा है।
फेडरेशन हरियाणा सरकार से मांग करता है कि एग्री डिस्कॉम संबंधी इस अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही, केंद्र सरकार को भी किसी भी रूप में विद्युत (संशोधन) विधेयक को पुनः लाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
ईईएफआई देशभर के सभी बिजली कर्मचारियों, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और आम जनता से आह्वान करता है कि वे हरियाणा में इस खतरनाक कदम तथा अन्य राज्यों में ऐसे सभी समान प्रयासों का एकजुट होकर विरोध करें। उन्होंने बिजली वितरण के सार्वजनिक स्वामित्व की रक्षा तथा किसानों और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि निजीकरण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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