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फरीदाबाद में एक सरकारी अस्पताल की पार्किंग में महिला की डिलीवरी कराई गई। पार्किंग में लाइट की व्यवस्था भी नहीं थी। महिला स्टाफ ने टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी के बाद की सभी प्रक्रियाएं पूरी कीं।
महिला के परिवार का आरोप है कि जब वे उसे डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर आए, तो वहां कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं था। मेन गेट भी बंद था, और इमरजेंसी वार्ड में भी कोई नर्स नहीं मिली। महिला को लेबर पेन हो रहा था।
इसके बाद, परिवार के साथ आई एक महिला ने पार्किंग में ही उसकी डिलीवरी कराई। महिला ने बेटे को जन्म दिया। परिवार के सदस्य व्हीलचेयर भी खुद ही लेकर आए। मामले में डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रचना का कहना है कि यदि कोई लापरवाही पाई जाती है, तो कार्रवाई की जाएगी।
- फरीदाबाद के बल्लभगढ़ (सेक्टर 3) सरकारी अस्पताल FRU-2 (फर्स्ट रेफरल यूनिट) में शुक्रवार-शनिवार रात करीब 2 बजे बड़ौली गांव का एक परिवार महिला की डिलीवरी कराने पहुंचा। महिला बलेश को लेबर पेन हो रहा था। बलेश के जेठ चमन चंदीला ने कहा कि रात में अस्पताल का मेन गेट भी बंद था।
- : चमन ने बताया कि मैं गेट खोलकर तुरंत इमरजेंसी वार्ड में पहुंचा, वहां भी कोई स्टॉफ मेंबर मौजूद नहीं था। परिवार के अन्य लोग बलेश को लेकर पार्किंग में ही खड़े थे। मैं खुद ही व्हीलचेयर लेकर पार्किंग में पहुंचा।
चमन ने आगे बताया कि बलेश के साथ मां भी मौजूद थी। पार्किंग में काफी देर तक अस्पताल का कोई स्टाफ नहीं पहुंचा। बलेश की हालत गंभीर होती जा रही थी। मजबूरी में मां को ही बलेश की डिलीवरी करानी पड़ी। अगर समय से डिलीवरी न होती बलेश और उसके बच्चे, दोनों की मौत हो सकती थी।

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