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फरीदाबाद, 11 मई - जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में हरियाणा राज्य विज्ञान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एचएससीएसआईटी), पंचकूला के सहयोग से राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम “इलेक्ट्रिक व्हीकल्स एवं सतत ऊर्जा” रही, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लेकर तकनीक के बदलते स्वरूप और उसके सामाजिक प्रभावों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रो. राजकुमार, अधिष्ठाता, अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय द्वारा राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए की गई। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार आज के समय में समाज और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को अधिक सुखद और सरल बनाना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपनी तकनीकी शिक्षा और नवाचार क्षमता का उपयोग समाज की समस्याओं के समाधान के लिए करें। कुलगुरु ने विश्वविद्यालय में स्थापित किए जा रहे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन इलेक्ट्रिक व्हीकल्स सहित नई ढांचागत परियोजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र श्री कपिल सिंघल, प्रबंध निदेशक, बी.पी. रिफकूल, ने इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि फेज चेंज मटेरियल जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इलेक्ट्रिक बसों, यात्री वाहनों और कोल्ड-चेन परिवहन में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके अतिरिक्त डॉ. संजय यादव, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, प्रो. आशीष श्रीवास्तव, श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, तथा डॉ. मुख्तियार सिंह, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने भी इलेक्ट्रिक वाहन तकनीक और सतत ऊर्जा के विभिन्न आयामों पर अपने विचार साझा किए।
इस अवसर पर प्रो. राजेश आहूजा, विभागाध्यक्ष, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. आत्मा राम एवं डॉ. अभिनव सक्सेना, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।

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