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डिलिवरी मामले में ग्रुप डी कर्मचारी की बर्खास्तगी, बड़े अधिकारियों के बचाने का प्रयास: सुभाष लांबा

Posted by : pramod goyal on : Friday, 22 May 2026 0 comments
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 फरीदाबाद,22 मई।


पिछले शुक्रवार रात को सेक्टर तीन स्थित प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केन्द्र (एफआरयू 2 ) में एक महिला की पार्किंग के अंधेर में हुई डिलिवरी होने की शर्मनाक घटना घटित हुई। इसकी विडियो वायरस होने पर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में मामले की जांच के नाम पर एक स्टाफ नर्स और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिम्मेदार ठहराते हुए क्रमशः फतेहपुर तगा व बीके अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया और दोनों ने 20 मई को अपनी अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली। इसके बाद बृहस्पतिवार को विभाग द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को बर्खास्त करने के आदेश जारी कर दिए। जिसको लेकर कर्मचारियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई और उसी समय तूरंत प्रभाव से डाक्टर सहित मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने प्रदर्शन में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा,आशा वर्कर यूनियन की राज्य प्रधान सुधा, जिला प्रधान हेमलता गोयल, उप प्रधान सुशीला चौधरी,मेल्टीपर्पज हैल्थ वर्कर्स एंड सुपरवाइजर एसोसिएशन हरियाणा की तालमेल कमेटी की राज्य अध्यक्ष आशा शर्मा, चेयरमैन जितेन्द्र मोर,जिला अध्यक्ष सबिता, एमपीएचई के प्रधान श्यामबीर सिंह, सचिव अजय प्रजापति, कोषाध्यक्ष कपिल शर्मा,प्रेस सचिव शशि, ज्वाइंट कन्वीनर आशा और सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर व सचिव वीरेंद्र पहुंचे। 
शुक्रवार को दूसरे दिन भी धरना प्रदर्शन

जारी रहा। उक्त नेताओं ने सीएमओ को नोटिस दिया है कि बर्खास्तगी व ट्रांसफर आदेश वापस नहीं लिए गए तो सोमवार को जिले के सभी स्वस्थ कर्मचारी आंदोलन में शामिल हो जाएंगे। 

सेक्टर तीन रेजिडेंट वेलफेयर फेडरेशन का मिल समर्थन 

धरने प्रदर्शन को उस समय बल मिला जब सेक्टर तीन रेजिडेंट वेलफेयर फेडरेशन के प्रधान सुभाष लांबा और महासचिव रतनलाल राणा अपने दर्जनों पदाधिकारियों के साथ धरना प्रदर्शन में पहुंच गए और ग्रुप डी कर्मचारी सुखबीर सिंह को बर्खास्त करने के खिलाफ चल रहे आंदोलन का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि डिलिवरी मामले में विभाग चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बर्खास्त करके जिम्मेदार बड़े अधिकारियों के बचाने का प्रयास कर रहा है। जिसको सहन नहीं किया जा सकता है। फेडरेशन के प्रधान सुभाष लांबा ने कहा कि पार्किंग के अंधेर में किसी महिला की डिलीवरी होना काफी शर्मनाक घटना है। जिससे हम सब स्तब्ध है। 
उन्होंने कहा कि मेन गेट किस अधिकारी ने बंद कराया था, पार्किंग में अंधेरा क्यों है, डिलीवरी वाले तल पर पीने का पानी और वाशरूम में हाथ साफ करने का पानी क्यों नहीं है, डिलीवरी में सबसे आवश्यक अल्ट्रासाउंड मशीन क्यों नहीं है और अस्पताल में रात को सिजेरियन डिलीवरी आपरेशन क्यों नहीं हो रहें हैं,इसकी जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या इन सबके लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और स्टाफ नर्स जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि स्टाफ के बार बार कहने के बावजूद बीके अस्पताल की तरह गेट पर चौकीदार या सुरक्षा गार्ड क्यों नहीं है। अगर ऐसा होता तो यह शर्मनाक घटना घटित ही नहीं होती। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि सुखबीर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद धोबी है। इसके बावजूद वह मल्टी टास्क स्टाफ की तरह काम करता है और डिलीवरी के समय वह मौके पर मौजूद था और उसने व स्टाफ नर्स ने ही जच्चा-बच्चा को वार्ड में शिफ्ट किया। सुखबीर सिंह ने जच्चा-बच्चा (दोनों) का पूरा ख्याल भी रखा। जिसके कारण महिला और उनके परिजन संतुष्ट हैं और उन्होंने सीएमओ को यह लिखकर भी दिया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था की विफलता है, इसके लिए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए यहां के अधिकारी, सीएमओ,डीजी और एचएम सहित सभी अन्य उच्च अधिकारी जिम्मेदार है। जिन्होंने समय रहते व्यवस्था ठीक क्यों नहीं की।

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