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फरीदाबाद,20 मई।
कर्मचारी संग
ठनों ने पांच राज्यों के संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के फोरन बाद सरकार द्वारा पेट्रोल,डीजल, सीएनजी और एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी के फैसले की निंदा की है और बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग की है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा व उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने पहले से ही महंगाई, बेरोज़गारी, स्थिर वेतन और बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहे काम करने वाले लोगों पर पेट्रोल और डीज़ल में ₹4 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹3 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी से और बोझ पड़ेगा। इस बढ़ोतरी से मंहगाई को पंख लगेंगे और आम आदमी के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा होगा। उन्होंने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का यह कहना कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से उन्हें “अंडर-रिकवरी” का सामना करना पड़ रहा है, मंज़ूर नहीं है और गुमराह करने वाला है। इन्हीं तेल कंपनियों ने पिछले कई सालों में जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें दबी या कम रहीं, तब भी भारी मुनाफा कमाया। ‘अंडर-रिकवरी’ शब्द अपने आप में एक गलत नाम है। यह तेल मार्केटिंग कम्पनियों को हुए असली नुकसान को नहीं दिखाता है; बल्कि, यह मौजूदा राजस्व और अगर ईंधन की कीमतें और बढ़ने दी जातीं तो उन्हें मिलने वाले बड़े मुनाफे के बीच एक काल्पनिक कमी को बताता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लोगों को फायदा देने से मना करके भी बहुत ज़्यादा राजस्व कमाया। आज, जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊपर-नीचे होती हैं, तो बोझ तुरंत आम लोगों के कंधों पर डालने की कोशिश की जाती है। यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मियों को महंगाई भत्ते में ऊंट के मूंह में जीरे के समान बढ़ोतरी कर रही है और अंतरिम राहत देने को तैयार नहीं है। सरकार ने न्यूनतम वेतन में भी मामूली बढ़ोतरी की है और उसे भी लागू करवाने में भी सरकार विफल हो रही है।
ठनों ने पांच राज्यों के संपन्न हुए विधानसभा चुनाव के फोरन बाद सरकार द्वारा पेट्रोल,डीजल, सीएनजी और एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी के फैसले की निंदा की है और बढ़ोत्तरी को वापस लेने की मांग की है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा व उपाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री ने पहले से ही महंगाई, बेरोज़गारी, स्थिर वेतन और बढ़ते आर्थिक संकट से जूझ रहे काम करने वाले लोगों पर पेट्रोल और डीज़ल में ₹4 प्रति लीटर और सीएनजी में ₹3 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी से और बोझ पड़ेगा। इस बढ़ोतरी से मंहगाई को पंख लगेंगे और आम आदमी के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा होगा। उन्होंने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का यह कहना कि वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से उन्हें “अंडर-रिकवरी” का सामना करना पड़ रहा है, मंज़ूर नहीं है और गुमराह करने वाला है। इन्हीं तेल कंपनियों ने पिछले कई सालों में जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें दबी या कम रहीं, तब भी भारी मुनाफा कमाया। ‘अंडर-रिकवरी’ शब्द अपने आप में एक गलत नाम है। यह तेल मार्केटिंग कम्पनियों को हुए असली नुकसान को नहीं दिखाता है; बल्कि, यह मौजूदा राजस्व और अगर ईंधन की कीमतें और बढ़ने दी जातीं तो उन्हें मिलने वाले बड़े मुनाफे के बीच एक काल्पनिक कमी को बताता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने लोगों को फायदा देने से मना करके भी बहुत ज़्यादा राजस्व कमाया। आज, जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें ऊपर-नीचे होती हैं, तो बोझ तुरंत आम लोगों के कंधों पर डालने की कोशिश की जाती है। यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मियों को महंगाई भत्ते में ऊंट के मूंह में जीरे के समान बढ़ोतरी कर रही है और अंतरिम राहत देने को तैयार नहीं है। सरकार ने न्यूनतम वेतन में भी मामूली बढ़ोतरी की है और उसे भी लागू करवाने में भी सरकार विफल हो रही है।
लांबा ने कहा कि प्रेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी परिवहन की लागत पर बुरा असर डालने के अलावा, इनका पूरी अर्थव्यवस्था पर एक जैसा असर पड़ना तय है, जिसमें ज़रूरी चीज़ों, खेती के लागत और आधारभूत सेवाओं की बढ़ती कीमतें शामिल हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है। सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर ऑटो ड्राइवरों, परिवहन श्रमिकों और सस्ते पब्लिक और साझा परिवहन पर निर्भर लाखों लोगों पर पड़ता है। उन्होंने सरकार से पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है।

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