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राष्ट्रीय - समाज सेवी हरीश चन्द्र आज़ाद ने कहा कि आज देश की 40 प्रतिशत जनता का चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर अविश्वास होना लोकतंत्र के लिया बहुत बड़ा खतरा हैं. उन्होंने कहा कि मैं नहीँ कहता कि चुनाव आयोग किसी के दबाव में काम कर रहा हैं लेकिन मैं ये यकीन से कह सकता हुँ कि देश कि 40 प्रतिशत जनता और सभी विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग की कार्यशैली पर विश्वास नहीँ करती जिसके बहुत सारे मज़बूत कारण भी हैं जो स्वयं चुनाव आयोग ने पैदा किये हैं.
हरीश आज़ाद ने कहा कि सबसे बड़ा कारण एस आई आर बन चुका हैं उन्होंने कहा कि मेरे बताये गए कारणों पर बुद्धिजीवी व पत्रकार जरूर ध्यान दें. मुख्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक आर टी आई पर सुनवाई के दौरान साफ कहा कि उनके पास कोई लिखित प्रमाण नहीँ हैं कि एस आई आर की जरुरत क्यों पड़ी और इसको किसके कहने पर लागू किया गया यहाँ गौर करने वाली बात ये हैं कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था हैं और यदि एस आई आर का फैसला चुनाव आयोग क़ी मीटिंग में नहीँ लिया गया तो फिर ये किसके कहने पर लागू किया गया? क्या बीजेपी द्वारा लिया गया?
हरीश आज़ाद ने बताया क़ी इससे भी ज्यादा चुनाव आयोग क़ी अविश्वासनीयता पर सवाल बंगाल के चुनावों के तरीकों ने किया. बंगाल में सबसे पहले चुनाव आयोग ने एक करोड़ पेंतीस लाख वोटर्स के नाम सेलेक्ट किये क़ी ये लोग वोट नहीँ डाल सकते कारण बताये कि पिछले चुनावों की लिस्ट से आपने नाम के अक्षर नहीँ मिल रहें, आपके पिता के नाम के अक्षर नहीँ मिल रहें, इसलिए आपको नोटिस जारी करते हैं कि आप वोट नहीँ डाल सकते यहाँ ध्यान दीजिये कि ये नोटिस सिर्फ बंगाल में जारी किये गए फिर चुनाव आयोग ने निर्णय लिया कि उसमे से 75 लाख लोग वोट डाल सकते हैं बाकि 60 लाख वोटर्स को हम डिलीट कर रहें हैं वोटर्स लिस्ट से यहाँ गौर करने कि बात ये हैं कि ये किसने और कैसे निर्णय लिया कुछ साफ नहीँ करा चुनाव आयोग ने. उसके बाद बात सुप्रीम कोर्ट में चली और जहाँ निर्णय लिया गया कि 27 लाख लोग वोट नहीँ कर सकते जबकि उन 27 लाख वोटर्स कि कोई सुनवाई नहीँ हुई. जबकि उन वोटर्स ने सफाई भी दी लेकिन उनको कहा गया कोई नहीँ आप अगली बार वोट दें देना आपको हम वोटर्स होने से वंचित नहीँ करेंगे अब यहाँ बात गौर करने कि ये हैं कि सुप्रीम कोर्ट के कहने पर 34 लाख लोगों कि अपील आई जिनमे सिर्फ 2 लोगों के पत्रों पर सुनवाई हुयी और आप ये जानकर हैरान होंगे कि उनमे से लगभग सभी वोटर्स ठीक पाए गए और उनको वोट का अधिकार दिया गया अब ज़रा सोचे अगर सभी 27 लाख वोटर्स के पत्रों पर सुनवाई होती और उन सभी को वोट का अधिकार मिल जाता तो बंगाल के चुनावों का परिणाम कुछ और होगा ये मैं इसलिए कह रहा हुँ क्योंकि बंगाल कि 150 सीटों पर जीत का अंतर वहां की काटी गई वोटों से कम रहा.
आज़ाद ने कहा कि अंतिम कारण चुनाव आयोग कि अविश्वासतनीता का ये भी हैं कि टी ऍम सी ने चुनाव आयोग से सभी बूथों कि सी सी टी वी फुटेज मांगी हैं जिसको चुनाव आयोग मना कर रहा हैं देने में.
अब आप बातएं कि इस तरह चुनाव आयोग की कार्यशैली पर देश की जनता कैसे विश्वास कर सकती हैं और अगर ऐसा की चलता रहा तो देशवासियों का देश के लोकतंत्र पर ही विश्वास उठ जायेगा जो कि किसी भी देश के लिए अच्छा नहीँ हैं, इसलिए मैं चुनाव आयोग और देश के कानून से अपील करता हुँ कि इस विषय पर जल्द से जल्द कार्य करके देश के लोकतंत्र को मज़बूत किया जाये.


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