तपती गर्मी के बीच इन दिनों हरियाणा की राजनीति में भी पूरी तरह से गर्माहट बनी हुई है। शुक्रवार को जहां लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह की यात्रा में पहुंचे थे तो वहीं नगर निगम के चुनावों को लेकर शह-मात का खेल रहा। इन सबके बीच पिछले माह हो भाजपा की राज्यसभा की सदस्य रेखा शर्मा की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री ची. भजनलाल व उनके बड़े बेटे चंद्रमोहन विश्नोई पर की गई टिप्पणी के बाद जहां चौ. भजनलाल के बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई उन्हें कानूनी नोटिस भेज चुके हैं तो छोटे बेटे कुलदीप बिश्नोई भी लगातार पलटवार कर रहे हैं। यही नहीं, रेखा शर्मा के बयान के बाद चौ. भजनलाल के समर्थकों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
गौरतलब है कि चौ. भजनलाल 9 बार आदमपुर से वि
धायक रहने के अलावा 3 बार प्रदेश के मुख्यमंत्री, 3 बार लोकसभा के सदस्य एवं 2 बार केंद्र में मंत्री रहे हैं। इसी तरह से चंद्रमोहन विश्नोई 4 बार कालका से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में वह पंचकूला से कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे ही कुलदीप बिश्नोई 4 बार आदमपुर से विधायक रहने के अलावा एक बार हिसार से जबकि एक बार भिवानी से सांसद रह चुके हैं। कुलदीप विश्नोई इस समय विदेश में हैं और वह अगले सप्ताह में भारत वापस आएंगे और अपने समर्थकों के साथ बैठक करने के बाद 3 जून को चौ. भजनलाल की पुण्यतिथि पर कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
कुलदीप बिश्नोई का हरियाणा व राजस्थान के साथ पंजाब के भी कुछ क्षेत्रों में प्रभाव माना जाता है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उछल रहा है कि कुलदीप विश्नोई का अगला कदम क्या होगा? अगर कुलदीप विश्नोई भाजपा से अलग राह चुनते हैं तो इसका असर केवल आदमपुर या हिसार तक सीमित नहीं रहेगा। हरियाणा की राजनीति में अक्सर चुनाव 2 से 5 प्रतिशत वोट के अंतर से तय होते हैं। ऐसे में यदि भजनलाल, कुलदीप समर्थक वीट बैंक भाजपा से दूर होता है तो कई सीटों पर सीधा नुकसान संभव माना जा रहा है। विशेषकर ये क्षेत्र जहां गैर-जाट मतदाता भाजपा का मुख्य आधार रहे हैं, वहां राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
बीजेपी छोड़ सकते है कुलदीप बिश्नोई , हरियाणा की राजनीति में भी पूरी तरह से गर्माहट

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