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कर्मचारी व मजदूर संगठन मानेसर (गुरुग्राम) में मजदूर आंदोलन पर पुलिसिया दमन के खिलाफ हुए लामबंद

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 12 April 2026 0 comments
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 फरीदाबाद ,12 अप्रैल।


कर्मचारी और मजदूर संगठनों ने मानेसर में मजदूरों के आंदोलन पर सरकार के निर्देश पर किए बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज व 55 मजदूरों के खिलाफ संगीन मामले दर्ज करने की घोर निन्दा की है। मजदूरों के प्रमुख संगठन सीआईटीयू ने इस दमन के खिलाफ 16 अप्रैल को राज्य भर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने शोशल मीडिया फेस बुक पर लाइव चलाने पर पुलिस द्वारा सीटू महासचिव जय भगवान व उप प्रधान विनोद कुमार को चेतावनी नोटिस देने की भी कड़ी निन्दा की। उन्होंने कहा कि यह एक नोटिस सीटू को आंदोलन से दूर करने की साज़िश है,जो किसी भी सूरत में कामयाब नहीं होगी।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष नरेश कुमार शास्त्री व सीटू हरियाणा के राज्य महासचिव कॉमरेड जय भगवान ने बताया कि कारखानों में काम करने वाले मजदूरों का आज भयंकर शोषण किया जा रहा है। मजदूरों से बिना किसी ओवरटाइम के 12 से 14 घण्टे काम लिया जा रहा है और साप्ताहिक अवकाश तक नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानेसर में हुए घटनाक्रम के लिए मालिक और खुद सरकार इसकी जिम्मेदार है। क्योंकि ट्रेड यूनियनों की मांग के बावजूद पिछले 6 साल से न्यूनतम मजदूरी तय नहीं कि जा रही थी। ट्रेड यूनियनों ने प्रदेश में 26 हजार वेतन तय करने की मांग उठाई। 8 मई से लेकर 29 दिसम्बर 2025 तक न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 9 त्रिपक्षीय (श्रम विभाग, ट्रेड यूनियनों और मालिक प्रतिनिधियों के बीच) बैठक हुई। 29 दिसम्बर को पानीपत में हुई अंतिम बैठक में 23196 मासिक न्यूनतम मजदूरी तय करने पर सर्व सम्मति बन बन गई थी। लेकिन सरकार ने मालिकों के हितों की रक्षा करने के लिए 2 मार्च बजट भाषण में 15220 रुपये की घोषणा की और उसका भी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया। अगर सरकार ये अधिसूचना जारी कर देती तो यह नौबत नहीं आती। महंगाई ने मजदूरों की कमरतोड़ रखी, कम मजदूरी के चलते मजदूरों का जीना हराम हो चुका है। जिसके कारण मजदूरों को मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने भी पुलिस दमन की घोर निन्दा की है। उन्होंने 6 साल बाद बढ़ाया गया न्यूनतम वेतन को भी ऊंट के मूंह में जीरे के समान बताया और इसमें बढ़ोतरी की मांग की।


सीटू महासचिव जय भगवान ने कहा कि पुलिसिया दमन पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि जब मुख्यमंत्री ने 8 अप्रैल को 4 बजे न्यूनतम वेतन की घोषणा कर दी थी और वातावरण शांत होने का हालात बन चुके थे तो ऐसे हालात में शाम 6 बजे धारा 163 का लगाने का क्या औचित्य था, मजदूर ज्यादा से ज्यादा एक-दो दिन और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन करके वापिस काम पर लौट जाते, और कुछ लौट भी गए थे। लेकिन लाठीचार्ज करना और उसके बाद 55 मज़दूरों को गिरफ्तार करना ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमला है और मालिक और सरकार दोनों एक साथ मिलकर मजदूरों को सबक सिखाना चाहती हैं कि हड़ताल और आंदोलन करोगे तो यही अंजाम होगा। लेकिन प्रदेश का मजदूर आंदोलन इसे स्वीकार नहीं करेगा इसको किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने वेतन की अधिसूचना पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि श्रम विभाग ने राज्य में कार्यरत 2 लाख भट्ठा मजदूरों की उपेक्षा की है। आज तक कि सभी अधिसूचनाओं में ईंट भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों की विभिन्न श्रेणियों के न्यूनतम वेतन तय होता था लेकिन इस अधिसूचना में मजदूरों का नाम नही है सीटू मांग करती है तुरन्त पूरी अधिसूचना जारी की जाए।

उन्होंने कहा कि सीटू मांग करती है कि झूठे मुकदमे रद्द किए जाए, सभी गिरफ्तार मजदूरों को बिना शर्त रिहा किया जाए, न्यूनतम सलाहकार समिति की बैठक में 23196 रुपये न्यूनतम वेतन की जो सहमति बनी थी उसको लागू किया जाए, सफीदों और फरीदाबाद सहित अनेक जगह कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं में मारे गए मजदूरों के परिजनों को 50 लाख मुआवजा दिया जाए तथा कार्यस्थल पर सुरक्षा के इंतजाम मजबूत किये जायें। इन सब माँगों को लेकर सीटू प्रदेश में 13 अप्रैल को मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन देगी तथा 16 अप्रैल को दमन विरोध प्रदर्शनों का आयोजन करेगी। सीटू प्रदेश के सभी ट्रेड यूनियनों संगठनों ओर मजदूरों से 16 अप्रैल के आंदोलन में भाग लेने की अपील करती। उन्होंने हरियाणा में जारी अग्निशमन के कर्मियों की हड़ताल का भी पुरजोर समर्थन करते हुए सरकार से वार्ता करके कर्मचारियों की सभी माँगों का समाधान करने की मांग की।

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