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न्यूनतम वेतन निर्धारण में जानबूझकर विलम्ब मजदूरों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार

Posted by : pramod goyal on : Saturday, 4 April 2026 0 comments
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 हरियाणा सरकार द्वारा श्रमिकों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के निर्धारण में जानबूझकर विलम्ब करके मजदूरों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। जबकि मुख्य मंत्री हरियाणा बजट सम्बोधन में दो बार घोषणा कर चुके हैं। परन्तु प्रशासन और श्रम विभाग  की निष्क्रियता देखने लायक है। 

यह कहना है हिंद मजदूर सभा हरियाणा के प्रधान एस डी


त्यागी‌ का।  उन्होंने कहा कि पीछले ग्यारह वर्ष में कोई रिवीजन नहीं हो सका तो छः सात महीने मिनी मम वेज बोर्ड की मीटिंग बुलाई गई है कमेटी ने अपने सुझाव व सलाह भी प्रस्तुत कर दी है। फिर भी सरकार बोर्ड की सिफारिश को नजरंदाज कर देरी करकें राज्य में औद्योगिक अशांति को पैदा कर रही हैं। जगह जगह पर उद्योग श्रमिकों कमी से जूझ रहे हैं। क्योंकि दिल्ली में अधिक वेतन मिलता है। हरियाणा में फरीदाबाद, गुरुग्राम और मानेसर में अनेक लघु उद्योग भी श्रमिकों के असंतोष को झेलना पड़ रहा है। यह चिंगारी ओर अधिक भड़क उठी तो राज्य में औद्योगिक संस्थानों में बहुत बड़ी अशांति पैदा हो जाएगी।  उसकी जिम्मेदारी ‌‌श्रम विभाग हरियाणा और हरियाणा सरकार की होगी। इसके परिणाम स्वरूप अप्रवासी श्रमिक अपने अपने घरों को वापस चलें जायेंगे और उनका जल्द वापस आना भी मुश्किल हो जाएगा। यह समस्या पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के प्रमुख उद्योगों को भी चपेट में ले लेंगी। सरकार की इस लापरवाही से पूरे देश में अशांति पैदा हो सकती है।  श्रमिक नेता त्यागी का कहना है कि अभी चारों लेबर कोड बनाकर मजदूरोका  मानसिक रूप से उतपिडन दिया जाएगा। वह भी आग में घी डाल ने जैसा काम कर रहा है।  सरकार की कथनी और करनी में अंतर नजर आ रहा है। सभी तरह की सुविधाएं और लाभ केवल उद्योग पतियों को देकर सरकार द्वारा औद्योगिक विकास कार्य में विलम्ब व रूकावट पैदा कर रही हैं। 

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