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चंडीगढ़,9 अप्रैल।
मजदूर संगठन सीटू हरियाणा प्रदेश महासचिव जय भगवान, उपाध्यक्ष सतवीर सिंह व विनोद कुमार ने कहा कि 6 साल की देरी से राज्य सरकार ने कल मजदूर आंदोलन के दबाव में 15220 रूपये न्यूनतम वेतन की घोषणा की है। यह बेहद कम है। राज्य में 2020 में न्यूनतम वेतन रिवाइज होना चाहिए था। उसके बाद 2025 में होना चाहिए था। रिवाइज करने की इस देरी के चलते मजदूरों की बड़ी आर्थिक हानि हुई है। उन्होंने कहा कि अब जब यह रिवाइज किया गया है तो काफी कम है। सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन को लेकर जो कमेटी बनाई गई, उसमें हमने तय मापदंडों के आधार पर 30000 रूपये न्यूनतम वेतन की मांग की थी। सरकार द्वारा गठित कमेटी की 9 बैठक हुई। पानीपत में 29 दिसंबर 2025 को हुई कमेटी की बैठक ने सर्वसम्मति से 23196 रूपये न्यूनतम वेतन के प्रस्ताव को सरकार को भेजा था। लेकिन सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन 15200 रूपये करने की घोषणा की गई। हमारी मांग तो 30 हजार रूपये वेतन की है लेकिन 29 दिसंबर 2025 को कमेटी की सर्वसम्मति से बनी राय के आधार पर 23196 रूपये को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने भी 15200 रुपए न्यूनतम वेतन को ऊंट के मूंह में जीरे के समान बताया। उन्होंने कहा कि 6 साल की देरी करने के कारण पहले ही मजदूरों को लाखों रुपए का नुक़सान हो चुका है। लेकिन सरकार ने इसकी भरपाई करने की बजाय कारखाना मालिकों के दबाव में मजदूरों के आर्थिक हितों पर कुठाराघात किया है।
मानेसर (गुरुग्राम) के कई आटोमोबाइल कंपनियों व गारमैंटस क्षेत्र के हजारों मजदूर पिछले कई दिन से वेतन बढ़ोत्तरी व अन्य मागों को लेकर शांतिपूर्वक धरना दे रहे हैं। लेकिन इस आन्दोलन पर पुुलिस द्वारा दमन की कार्यवाही की जा रही है। आज दिनांक 9 अप्रैल को भी शांतिपूर्वक धरने पर बैठे मजदूरों पर लाठीचार्ज किया गया, जिससे कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। मजदूरों की गिरफ्तारी भी की गई है। ऐसा किया जाना बेहद गलत है पुलिस द्वारा की गई इस कार्यवाही का तुरंत बंद किया जाए। जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई धारा 163 को भी वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि ईरान पर अमेरिकी इजराइल के हमले के बाद हालत बदतर हो गई हैं। बाजार से मजदूरों को जो गैस 80-90 रूपये किलो मिलती थी वह 400-500 रुपए किलो पहुंच चुकी है। सरकारी रेट से सस्ती गैस मजदूरों को मिले। इस बारे में सीटू ने राज्य के मुख्यमंत्री ओर श्रम मंत्री को पत्र लिखा है।

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