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बजट को जन आकांशाओं व स्थाई रोजगार की अनदेखी करने वाला बताया

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 3 March 2026 0 comments
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 फरीदाबाद ‌ 3 मार्च - भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हरियाणा राज्य कमेटी  ने ‌ विधानसभा के पटल पर कल रखे गए बजट को जन आकांशाओं व स्थाई रोजगार की अनदेखी करने और निजीकरण को बढ़ावा देने वाला बजट  बताया है  

 
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हरियाणा के राज्य सचिव मण्डल ने प्रदेश सरकार द्वारा   वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट की आलोचना की है l राज्य सचिव कामरेड प्रेम चंद और फरीदाबाद  के ‌ डिस्टिक सेक्रेट्री वीरेंद्र सिंह डंगवाल द्वारा ज़ारी एक बयान में कहा गया कि यह बजट जन आकांशाओं  व स्थाई रोजगार की अनदेखी करने व निजीकरण को बढ़ावा देने वाला है l उन्होंने कहा 
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 2,23,658 करोड रुपए का बजट पेश किया हैl इसे 10.8 प्रतिशत बढ़ोतरी का बजट बताया जा रहा है। गौरतलब है कि वित्त वर्ष 2025 -26 का बजट पेश करते हुए 13.7 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 2,05,017.29 करोड़ रखा गया थाl यदि इसे देखा जाए तो बजट में मात्र 9.09 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई हैl अब सरकार संशोधित              2,02,816. 66 करोड रुपए से जोड़कर बता रही है। यह केवल सुर्खियां बटोरने के लिए है l यह बजट 13,188.05 करोड़ रुपए घाटे का बताया जा रहा है l राज्य पर 3,91,435 करोड़ रुपए कर्ज बताया गया है l मुख्यमंत्री द्वारा इसे  विकास की छलांग बताया जा रहा है l जन कल्याण के आवंटन खर्च को देखा जाए तो वास्तव में यह बजट जन आकांशाओं व स्थाई रोजगार की अनदेखी करने और निजीकरण को बढ़ावा देने वाला बजट है l पिछले बजट की तुलना में इस बार कुल बजट का शिक्षा पर खर्च 10.88 प्रतिशत से घटकर 10.55 प्रतिशत कर दिया हैl सामाजिक न्याय व पोषण पर 9.14 प्रतिशत से घटाकर 7.71 प्रतिशत किया गया है l स्वास्थ्य पर जितना खर्च करना चाहिए वह भी कम है l वी बी ग्राम जी के तहत वित्त वर्ष में 125 दिन काम देने का सरकार द्वारा प्रचार किया जा रहा हैl  जबकि मनरेगा के तहत प्रदेश में पंजीकृत सक्रिय मजदूरों की संख्या 2024-25 में करीब 9 लाख   है l उसे देखते हुए बजट आवंटन बहुत कम है।  भाजपा सरकार ने मनरेगा को खत्म करके मजदूरों के साथ बड़ा धोखा किया है l युवाओं को  स्थाई रोजगार देने के लिए कुछ नहीं है। केवल इंटर्नशिप की बात की है। और बेरोजगारी भत्ता बढ़ाने में कोई नई बात नहीं है l श्रमिक लम्बे समय से 26000 रुपए न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं l जबकि सरकार ने मामूली न्यूनतम वेतन बढाने की बात की है। महंगाई को देखते हुए यह बहुत कम है।  कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने सहित कर्मचारियों की अन्य मांगों की घोर ‌ अनदेखी  हो रही  है l लाडो लक्ष्मी योजना के लिए भी बजट सीमित है  महिलाओं की बड़ी आबादी को इस योजना के लाभ से वंचित किया जा रहा है l किसानों, खेत मजदूरों को संकट से उभारने में सरकार ने इस बार फिर अनदेखी की है l कृषि क्षेत्र की मजबूती के नाम पर हरियाणा एग्री डिस्कॉम नाम से नई बिजली वितरण कंपनी बनाने की घोषणा के पीछे सरकार की मंशा बिजली बिल -2025 के अनुरूप कमाई वाले क्षेत्रों की बिजली निजी कम्पनियों को सौंपने की तरफ अग्रसर है l  कोरपोरेट   के हितों को पूरा करने के लिए बजट में निजीकरण पर जोर दिया गया है l सरकार बड़े पूंजीपतियों पर कर लगाकर समाज कल्याण व स्थाई रोजगार के लिए कदम उठा सकती थी। जिसे अनदेखा किया गया है l माकपा इस बजट की आलोचना करती है l  भाजपा के कारपोरेटपरस्त - साम्प्रदायिक गठजोड़ के खिलाफ माकपा  प्रदेश भर में ‌ अभियान चलाएगी। 

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