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हरियाणा सरकार शिक्षा का अधिकार RTE कानून को पूरी तरह लागू करने में विफल साबित हुई है। इसकी गूंज विधानसभा सत्र में सुनने को मिली है। विपक्ष के साथ-साथ समालखा के भाजपा विधायक मनमोहन भड़ाना ने भी इस गंभीर विषय को विधानसभा में उठाया है और सरकार से उचित कार्रवाई करने की मांग की है। मामला तूल पकड़ते देख विधानसभा के स्पीकर ने सरकार से आरटीई मामले में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट ओपी शर्मा व प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा ने कहा है कि सरकार शिक्षा का अधिकार RTE कानून लागू करने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। सरकार पूरी तरह से प्राइवेट स्कूल संचालकों को संरक्षण प्रदान कर रही है और उनको फायदा पहुंचाने की नीयत से ही इस आरटीई कानून को ठीक से लागू नहीं
कर रही है। मंच ने एक महीने में दो पत्र मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को लिखकर शिक्षा सत्र 2026-27 में गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिला कराने के लिये आरटीई नोटिफिकेशन फरवरी में ही जारी करने को कहा है जिससे एक अप्रैल से शुरू होने वाले शिक्षा सत्र से पहले ही आरटीई की सारी प्रक्रिया पूरी हो जाए और चिन्हित छात्रों की पढ़ाई प्राइवेट स्कूलों में 1 अप्रैल से शुरू हो जाए लेकिन मंच के पत्रों पर अभी तक कोई भी उचित कार्रवाई नहीं हुई है। मंच का कहना है कि एक ओर जहां महाराष्ट्र राजस्थान उत्तर प्रदेश में RTE 26नोटिफिकेशन जारी हो चुका है और आरटीई दाखिला प्रक्रिया शुरू हो गई है वहीं हरियाणा में अभी तक कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। मंच का आरोप है कि सरकार प्राइवेट स्कूलों को फायदा पहुंचाने की नीयत से ही जानबूझकर आरटीई नोटिफिकेशन मई जून में जारी करती है। तब तक प्राइवेट स्कूलों में सभी कक्षाओं में दाखिले पूरे हो जाते हैं और पढ़ाई भी शुरू हो जाती है।
मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा व प्रदेश लीगल एडवाइजर एडवोकेट बीएस बिरदी ने कहा है कि गत शिक्षा सत्र में सीबीएसई के 28 प्राइवेट स्कूलों ने शिक्षा विभाग द्वारा चिन्हित किए गए गरीब बच्चों को अपने स्कूल में दाखिला देने से मना कर दिया था जिसकी शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी ने दो बार पत्र लिखकर शिक्षा निदेशक पंचकूला से की थी और इन दोषी स्कूलों की NOC वापस लेकर मान्यता रद्द करने की सिफारिश की थी लेकिन अभी तक इन दोषी स्कूलों के खिलाफ कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की गई है। मंच के राष्ट्रीय सलाहकार व उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने भी मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को दो पत्र लिखकर इन 28 स्कूलों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की मांग की,बाद में लीगल नोटिस भी भेजा। तब भी सरकार ने इन स्कूलों के खिलाफ अभी तक कोई भी उचित कार्रवाई नहीं की है। अशोक अग्रवाल अब इस इन स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई कराने के लिए पंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।

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