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कालका स्टील कंपनी की आगजनी सरकार की गैर जिम्मेदारी और कंपनी मालिकों द्वारा सुरक्षा मानकों को न मानने का परिणाम

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 17 February 2026 0 comments
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 फरीदाबाद,17 फरवरी।


सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व सीटू हरियाणा ने राज्य में हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे राज्य सरकार की गैर जिम्मेदारी ओर

उद्योग मालिकों द्वारा सुरक्षा मानकों को न मानने का परिणाम बताया है। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा,सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और सीटू हरियाणा के राज्य महासचिव जय भगवान व जिला कमेटी के जिला उप प्रधान रवि गुलिया ने घायलों का समुचित उपचार और कम से कम दस लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की। क्योंकि जले व्यक्ति को कई सर्जरी करवानी होती है और देर तक इलाज चलता है। उल्लेखनीय है कि सोमवार को दुर्घटना फरीदाबाद में कालका स्टील में हुई दुर्घटना बहुत ही गंभीर घटना है, जिसमें दर्जनों मजदूर बुरी तरह से घायल हो गए और जिनमें तीन पुलिसकर्मी व दो दमकल कर्मी भी शामिल हैं। काफी मजदूरों को हालात बेहद चिंताजनक है। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री व सीटू की जिला कमेटी के उप प्रधान रवि गुलिया ने घटना के तूरंत बाद बीके अस्पताल का दौरा किया और घायलों से मुलाकात की और उनका हाल-चाल जाना। उन्होंने डाक्टर व स्टाफ से घायलों की हर संभव मदद की मांग की। श्री शास्त्री ने फरीदाबाद औद्योगिक नगरी होने के बावजूद बीके अस्पताल में बर्न वार्ड नं होने पर कड़ी नाराज़गी जताई।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा,सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री और सीटू हरियाणा के महासचिव जय भगवान व जिला उप प्रधान रवि गुलिया ने मंगलवार को जारी एक संयुक्त बयान में बताया कि असल में राज्य सरकार के काल में सुरक्षा उपायों ओर इसके लिए, निगरानी प्राधिकरण यानी सेफ्टी एंड हेल्थ विभाग को बेहद कमजोर किया गया है और न ही इसमें निरीक्षण के लिए पर्याप्त कर्मचारी हैं। दूसरी ओर सरकार ने कानूनों में बदलाव करके इस प्रकार की घटनाओं में उद्योग मालिक के खिलाफ क्रिमिनल केस की बजाय केवल कुछ जुर्माना लगाने तक सीमित कर दिया गया है। आज देश - प्रदेश में हर रोज घटनाएं घट रही हैं, मजदूर मारे जा रहे हैं। लेकिन घटनाओं कम नहीं हो रही बल्कि कानूनों में बदलाव करके उद्योग मालिक सुरक्षा मानकों के प्रति लापरवाह बने हैं और मजदूर मारे जा रहे हैं। उक्त नेताओं ने  घायलों का बेहतरी से इलाज और दो लाख रुपए मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।

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