सूरजकुंड मेला में झूला टूटने की दर्दनाक घटना को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन जांच को लेकर अब भी कई सवाल खड़े हैं। हादसे की जांच के लिए गठित कमेटी अब तक अपनी रिपोर्ट सौंपने में असफल रही है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित सहयोग न मिलने से पुलिस की एसआईटी की जांच प्रभावित हो रही है।
7 फरवरी की शाम को 6 बजे के करीब झूला के टूटकर गिर जाने से एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत सहित 12 लोग घायल हो गए थे।
जानकारी के मुताबिक, एसआईटी द्वारा मांगी गई अहम जानकारियों और दस्तावेजों को अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों से झूले की एनओसी, टेंडर से जुड़ी फाइलें, मैन्युफैक्चरिंग सर्टिफिकेट, इंस्पेक्शन कमेटी की रिपोर्ट, झूला स्थापित करने से पहले की मिट्टी जांच रिपोर्ट और जिम्मेदार अधिकारियों के नामों को लेकर जवाब मांगा गया था, लेकिन इन बिंदुओं पर अब तक संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी है।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि मेले में झूले लगाने के दौरान भारी लापरवाही बरती गई। कई झूले बिना वैध अनुमति के लगाए गए, उनके तकनीकी दस्तावेजों की जांच नहीं की गई और निरीक्षण प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई। मिट्टी की मजबूती की जांच भी नहीं कराई गई, जबकि इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की थी।
आशंका जताई जा रही है कि जवाबदेही से बचने के लिए अधिकारी एसआईटी को जानकारी देने से कतरा रहे हैं।
इस बीच, एसआईटी ने झूले के ऑपरेटर अदनान के खिलाफ भी ठोस साक्ष्य जुटा लिए हैं। गिरफ्तारी की भनक लगते ही वह फरार हो गया, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस मामले में टेंडर हासिल करने वाले मोहम्मद शाकिर और नितेश को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

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