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फरीदाबाद ।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने केंद्र सरकार द्वारा रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट को कर्मचारी-मजदूर विरोधी व जनविरोधी और कॉरपोरेट-परस्त
करार दिया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा का स्पष्ट मत है कि यह बजट मेहनतकश कर्मचारियों, पेंशनरों, संविदा-ठेका कर्मियों और बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि बजट में सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों जैसे पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर चुप्पी है। इसके अलावा बजट में 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा या वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। बजट में संविदा, ठेका, आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण पर भी पूरी तरह चुप्पी है। बजट में रिक्त पदों की भर्ती और रोजगार सृजन के सवाल को नजरअंदाज किया गया है। बेरोजगारी युवाओं को रोजगार देने की कोई ठोस योजना दिखाई नहीं दे रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अंतरिम राहत की घोषणा करने की बजाय कर्मचारियों को केवल महंगाई भत्ते (डीए) के भरोसे छोड़ा गया है, जबकि
करार दिया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा का स्पष्ट मत है कि यह बजट मेहनतकश कर्मचारियों, पेंशनरों, संविदा-ठेका कर्मियों और बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि बजट में सरकारी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों जैसे पुरानी पेंशन योजना लागू करने पर चुप्पी है। इसके अलावा बजट में 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई स्पष्ट समय-सीमा या वित्तीय प्रावधान नहीं किया गया है। बजट में संविदा, ठेका, आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण पर भी पूरी तरह चुप्पी है। बजट में रिक्त पदों की भर्ती और रोजगार सृजन के सवाल को नजरअंदाज किया गया है। बेरोजगारी युवाओं को रोजगार देने की कोई ठोस योजना दिखाई नहीं दे रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच अंतरिम राहत की घोषणा करने की बजाय कर्मचारियों को केवल महंगाई भत्ते (डीए) के भरोसे छोड़ा गया है, जबकि
आयकर में कोई ठोस राहत नहीं दी गई, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और आवास की बढ़ती लागत का कोई समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर बड़े कॉरपोरेट घरानों को टैक्स रियायतें और नीतिगत सुविधाएं लगातार दी जा रही हैं। जिससे आर्थिक असमानता बढ़ती जा रही है।
निजीकरण और सार्वजनिक सेवाओं पर खतरा
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बजट में सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण,PPP मॉडल के विस्तार,सामाजिक क्षेत्र में सरकारी खर्च की सीमित वृद्धि को लेकर गहरी चिंता जताई और कहा कि इससे सरकारी नौकरियां, सेवा-सुरक्षा और जनहित सीधे प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र एवं राज्य कर्मचारी सरकार की जनविरोधी एवं कर्मचारी और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी को ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व राष्ट्रीय हड़ताल करेंगे और सरकार को माकूल जवाब देंगे तथा अगली आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे।

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