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मुख्यमंत्री के फरीदाबाद दौरे के दौरान पूर्व बसपा मेयर प्रत्याशी मनसा पासवान को किया हाउस अरेस्ट

Posted by : pramod goyal on : Friday, 9 January 2026 0 comments
pramod goyal
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 मनसा पासवान, बहुजन समाज पार्टी (BSP) की पूर्व फरीदाबाद नगर निगम मेयर प्रत्याशी, अपनी तरफ से और पार्टी की ओर से गहरी निंदा व्यक्त करती हूं कि हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के फरीदाबाद दौरे के दौरान मुझे भारी पुलिस बल द्वारा मेरे घर से जबरन उठाकर डिटेन (नजरबंद) किया गया। यह कार्रवाई बिना किसी लिखित वारंट, बिना किसी आरोप के और बिना पूर्व सूचना के की गई, जो पूरी तरह से असंवैधानिक, गैरकानूनी और राजनीतिक प्रतिशो


ध की भावना से प्रेरित है।

घटना का संक्षिप्त विवरण
मुख्यमंत्री के फरीदाबाद आने से पहले ही पुलिस ने मेरे आवास पर भारी संख्या में जवान तैनात कर दिए।
मैं शांतिपूर्ण तरीके से स्थानीय जनता की समस्याओं (जैसे जलभराव, विकास कार्यों में भेदभाव, ट्रैफिक आदि) को लेकर अपनी बात रखने या विरोध दर्ज करने का संवैधानिक अधिकार रखती हूं।
लेकिन पुलिस ने मुझे और मेरे साथियों को घर से बाहर निकलने भी नहीं दिया  कई घंटों तक घर में ही नजर बंद रखा।
शाम को रिहा किया गया, लेकिन इस दौरान मेरे मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ।
मेरा स्पष्ट बयान
यह डिटेन कानूनन पूरी तरह गलत है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), अनुच्छेद 21 (जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 22 (निवारक निरोध से सुरक्षा) का सीधा उल्लंघन हुआ है। यह कोई पहली घटना नहीं है – सत्ताधारी दल विपक्षी नेताओं को दबाने के लिए ऐसी कार्रवाइयां बार-बार कर रहा है। मैं बसपा की एक जुझारू कार्यकर्ता हूं, जो बहुजन समाज के हितों के लिए लड़ती रही हूं।  जनता का समर्थन मेरे साथ है।
हमारी मांगें
फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर द्वारा इस घटना की तुरंत उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई हो।
मुख्यमंत्री एवं हरियाणा सरकार द्वारा सार्वजनिक माफी मांगी जाए।
भविष्य में किसी भी राजनीतिक नेता/कार्यकर्ता के साथ ऐसी मनमानी न हो – लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सुरक्षित रहे।
मैं इस मामले में उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने पर विचार कर रही हूं।
बहुजन समाज पार्टी और मैं फरीदाबाद की जनता के साथ मिलकर इस अन्याय के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। लोकतंत्र में डर का माहौल नहीं, बल्कि संवाद और बहस का होना चाहिए।

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