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फरीदाबाद 16 जनवरी
फैक्ट्रीयों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा और दुर्घटना होने पर उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा और मुआवजा देने की मांग को लेकर आज जॉइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल फरीदाबाद का शिष्टमंडल उप श्रम आयुक्त श्री भगत प्रताप सिंह से मिला। इस बाबत उन्हें ज्ञापन भी दिया। शिष्टमंडल में कन्वीनर वीरेंद्र सिंह डंगवाल, इंटक के हुक्म चंद बैनिवाल, एटक के आर एन सिंह, एच एम एस के आर डी यादव,सीटू के शिव प्रसाद और के पी सिंह, बैंक के कृपाराम शर्मा, उपस्थित रहे।
काउंसिल के नेताओं ने बताया कि कंपनी प्रबंधकों की लापरवाही की वजह से विभिन्न कारखानों और वर्कशॉपों में लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। जिसमें श्रमिकों को फैक्ट्री में काम करते हुए अपनी जान तक गंवानी पड़ती है। ऐसी घटनाएं तब घटती है। जब मालिकों के द्वारा श्रमिकों को काम करने के लिए उपयुक्त संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं। फैक्ट्री मालिक कंपनी की मेंटेनेंस पर ध्यान नहीं देते हैं। बरसों पुराने उपकरणों पर मजदूरों को काम करने के लिए मजबूर किया जाता है। जिस
के कारण फैक्ट्री में आग लगने जैसी घटनाएं होती हैं। कई ऐसे भी मामले संज्ञान में आए हैं। जिसमें मालिक और मजदूर के बीच में थोड़ा बहुत विवाद होने पर मजदूर के साथ बदले की भावना से कार्यवाही करते हुए उसको दंडित करने के इरादे से मारा पीटा जाता है। पिछले दिनों सरूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में स्वर्गीय नगीना राम निवासी नेहरू कॉलोनी को उसके फैक्ट्री मालिक के साथ वाद - विवाद होने की वजह से मालिक ने उसे उबलते हुए पानी के टैंक में फेंक दिया। बुरी तरह जल जाने के बाद भी उसका इलाज नहीं कराया।बाद में उसका
के कारण फैक्ट्री में आग लगने जैसी घटनाएं होती हैं। कई ऐसे भी मामले संज्ञान में आए हैं। जिसमें मालिक और मजदूर के बीच में थोड़ा बहुत विवाद होने पर मजदूर के साथ बदले की भावना से कार्यवाही करते हुए उसको दंडित करने के इरादे से मारा पीटा जाता है। पिछले दिनों सरूरपुर इंडस्ट्रियल एरिया में स्वर्गीय नगीना राम निवासी नेहरू कॉलोनी को उसके फैक्ट्री मालिक के साथ वाद - विवाद होने की वजह से मालिक ने उसे उबलते हुए पानी के टैंक में फेंक दिया। बुरी तरह जल जाने के बाद भी उसका इलाज नहीं कराया।बाद में उसका
ई एस आई सी अस्पताल ने इलाज के दौरान उसे सफदरजंग दिल्ली रेफर कर दिया। यहां ईलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई । उन्होंने कहा कि श्रम विभाग को फैक्ट्री मालिकों को श्रमिकों को जोखिम भरे कार्यों को करने के लिए जीवन रक्षक उपकरण देना सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया जाए। ताकि जान माल का नुकसान नहीं होने पाए। इसके लिए अच्छी क्वालिटी के औजार उपलब्ध करवाने के आदेश देने चाहिए । कन्वीनर ने यह बताया कि कई मामलों में मजदूरों का कंपनी में एक्सीडेंट हो जाने के बाद मालिक उस वर्कर को पहचानने से भी इंकार कर देते हैं। क्योंकि फैक्ट्री में कच्चे श्रमिकों का कोई रिकॉर्ड नहीं होता है। उसका पंजीकरण नहीं होने की वजह से मालिक अपना बचाव कर लेते हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को कंपनी प्रबंधकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होनी चाहिए। लेकिन पुलिस का भी इस मामले पर रवैया ढुलमुल ही रहता है। जिसके कारण पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल पाता। इस लिए यदि श्रम विभाग इस तरह के केसों को गभीरता से लेगा तो मृतक मजदूर के परिजनों को मुआवजा मिलने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए कंपनी प्रबंधकों को वर्करों के परिजनों के साथ अच्छा व्यवहार करने के बारे में भी सलाह दी जाए। आज ही शिष्टमंडल मंडल ने सेफ्टी और हेल्थ के ज्वाइंट डायरेक्टर से भी मुलाकात की। उनसे सभी फैक्ट्रियों में सुरक्षा के उपकरण लगाए जाने बारे सख्त कदम उठाए जाने की अपील की।

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