हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने फरीदाबाद में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) द्वारा प्लॉट आवंटन से जुड़े एक मामले में सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद पाया कि 8 अक्टूबर को दिए गए अंतरिम आदेशों के बावजूद आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार 5.5 प्रतिशत की दर से देय विलंबित कब्जा ब्याज का भुगतान अब तक नहीं किया गया है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के सक्षम अधिकारी इस देरी को लेकर कोई संतोषजनक कारण नहीं बता पाए। जबकि एस्टेट अधिकारी की ओर से समय रहते अतिरिक्त राशि की मांग कर दी गई थी, इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। आयोग ने अब ब्याज सहित जल्द मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
आदेश की कॉपी फील्ड कार्यालय एवं मुख्यालय दोनों को भेजी जा चुकी थी, इसके बावजूद अनुपालन न होना अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अधिकारियों को प्रशासनिक मार्गदर्शन देने का मंच नहीं है और भविष्य में अपेक्षा की जाती है कि अधिकारी यथोचित सावधानी रखेंगे।
सुनवाई के दौरान दिए गए आश्वासन के आधार पर आयोग ने निर्देश दिए हैं कि एस्टेट अधिकारी द्वारा मांगी गई धनराशि शीघ्र ट्रांसफर की जाए। साथ ही कब्जा ब्याज की राशि संबंधित आवंटी के खाते में जमा कराई जाए।
किसी भी प्रकार की आगे की देरी होने पर आयोग संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा। इसके अतिरिक्त, आयोग ने साल 2022 में सेक्टर 76 एवं 77, फरीदाबाद में विकास कार्य पूर्ण हुए बिना ई-नीलामी किए जाने के मामले पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है।
आयोग ने इस निर्णय की जिम्मेदारी तत्कालीन मुख्य प्रशासक, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण पर निर्धारित करते हुए कहा कि इस अनुमान आधारित निर्णय के कारण न केवल वर्तमान आवंटी बल्कि कई अन्य आवंटियों को भी अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। यह विषय उचित कार्रवाई के लिए हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव के संज्ञान में भी लाया गया है।

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