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राष्ट्रीय शिक्षा दिवस - राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर गुणवत्ता परक शिक्षा के लिए किया प्रेरित

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 11 November 2025 0 comments
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 गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराय ख्वाजा फरीदाबाद में प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के उपलक्ष्य में जूनियर रेडक्रॉस और सैंट जॉन एंबुलेंस ब्रिगेड ने विद्यार्थियों को गुणवत्ता परक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय की जूनियर रेडक्रॉस काउंसलर और ब्रिगेड अधिकारी प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा दिवस भारत के पहले शिक्षा मंत्री और विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों व नियामकों के संस्थापकों में से एक मौला


ना अबुल कलाम आजाद के शिक्षा में योगदान की स्मृति में उनकी जयंती पर मनाया जाता है। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस एक समान और सशक्त समाज के निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका के विषय में बताता है। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2025 राष्ट्र की शैक्षिक यात्रा और आकांक्षाओं को पूर्ण करने के लिए नए अवसर लेकर आया है। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि उन्होंने देश में उच्च शिक्षा के मुख्य नियामकों व संस्थानों जैसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ए आइ सी टी ई, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यू जी सी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान आइ आइ टी सहित अन्य नियामकों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। मौलाना आजाद ने कई संस्थानों की स्थापना की जिनमें ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और साहित्य अकादमी सम्मिलित हैं। राष्ट्रीय शिक्षा दिवस की थीम 

एआई और शिक्षा अर्थात स्वचालन के युग में मानव एजेंसी का संरक्षण रखा गया है। जो व्यक्तियों और समुदायों को तकनीकी प्रगति को समझने, समझने और प्रभावित करने के लिए शिक्षा की शक्ति पर चिंतन को प्रोत्साहित करता है।यह थीम पढ़ने पढ़ाने के लिए क्रिएटिव, अध्यापन के एडवांस तरीकों को प्रोत्साहित करने के महत्व पर बल डालता है। विषय एवं पाठ्यक्रम बदलना और शिक्षा में नवाचार और अन्वेषण को सम्मिलित करने को महत्व दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय प्रत्येक वर्ष एक अलग फोकस क्षेत्र निर्धारित करता है। प्राचार्य मनचंदा ने कहा कि शिक्षा हमें संस्कारवान, चरित्रवान बनने तथा सद्गुणों को आत्मसात करने के पथ पर अग्रसर करती है तथा हमें अधिक उत्तरदायित्व लेने के सक्षम बनाती है। मौलाना अबुल कलाम आजाद की जयंती को शिक्षा दिवस के रूप में मनाए जाने का शुभारंभ वर्ष 2008 से किया गया। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान आई आई एस सी बैंगलोर की स्थापना पर बल दिया। पहले भारतीय शिक्षा मंत्री के रूप में आजाद का मुख्य ध्यान स्वतंत्रता के बाद के भारत में ग्रामीण निर्धनों और लड़कियों को शिक्षित करना था। शिक्षा सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल में उन्होंने वयस्क साक्षरता चौदह वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य, सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा, और माध्यमिक शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर बल दिया। विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में छात्राओं द्वारा शिक्षा को उन्नति के लिए प्रमुख बताने वाले पोस्टर्स बनाने हेतु सम्मानित किया गया। प्राचार्य रविंद्र कुमार मनचंदा ने सहयोगी अध्यापकों गीता, दीपांजलि, दिनेश, सुशीला, राजकुमार तथा सभी अध्यापकों ने होनहार छात्राओं सम्मानित किया और सभी छात्र और छात्राओं से गुणवत्ता परक शिक्षा और नियमित परिश्रम कर संस्कारवान, कर्त्तव्यपरायण तथा राष्ट्र के प्रति समर्पित युवा होने के लिए प्रेरित किया।

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