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भारत सरकार द्वारा तथा राज्य सरकारों द्वारा श्रमिक सम्बंधित कानून को समाप्त करने से देश के तमाम श्रमिकों के मन में भय और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है हालांकि अभी बदलाव की घोषणा से पहले श्रमिकों के प्रतिनिधियों से बात चीत करने के बाद एक सहमति बनानकर जो घोषित होता तो उचित बदलाव से किसी पक्ष को आपत्ति नहीं होनी थी वैसे भी यह तिरपक्षीय मुद्दे हैं पहले बने नि
यम कानून बहुत मंथन और समय-समय पर संशोधित भी होते रहे हैं और श्रमिक वर्ग को उनके सभी प्रकार के शोषण से मुक्त करके जाब संरक्षण प्रदान करने के लिए प्रयास था हम सभी जानते हैं कि पूंजी अर्थ शक्ति है उसके अनैतिक विस्तार में श्रमशक्ति का शोषण दुनिया में होता रहा है इतिहास गवाह है, लोकतंत्र का आधार भी यही है लोगों के द्वारा ही एक सरकार तंत्र को गठित कर लोगों के लिए हितार्थ समर्पित हो कर निस्वार्थ भाव से जिम्मेदारी से काम निष्पक्ष और सन्तुलन से संवेदनशील होकर फैसला करना चाहिए तभी देश और समाज में विकास सम्भव है केवल कुछ चंद पूंजिपतियों की पूजिं का विस्तार देश समाज किसान व श्रमिकों के शोषण का आधार नहीं होना चाहिए हमारे राष्ट्रीय नेताओं में ऐसी सोच का अभाव है वह तो जिस वर्ग से चुनाव में धन चंदा लेकर सरकार बनेगी तो पहले उनको ही लाभान्वित करना अपना कर्तव्य और उद्देश्य बना लें तो यह राष्ट्र के नागरिकों का विकास कहना उचित नहीं है प्रति व्यक्ति जीडीपी ग्रोथ रेट दिखा कर राष्ट्र के अमीर पूंजी पतियों को अंतरराष्ट्रीय बैंक एवं राष्ट्र ऋण दे सकते हैं जो राष्ट्र एक एक नागरिक और आने वाले पीढ़ीयो के सिर पर कर्ज है हमें आवश्यकता है सुरक्षित रोजगार की सामाजिक सुरक्षा की अच्छी शुलभ शिक्षा की स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करें जो गरीब को सेवा प्रदान करें देश में विकास कार्य स्वतंत्रता के बाद से ही हो रहें हैं दुर्भाग्यवश वह गरीबी भुखमरी बेरोज़गारी की बुनियाद पर हो रहा है किसान व मजदूर अर्थात सभी मेहनत कश लोगों के शोषण ही खोखले विकास कार्य की बुनियाद पर खड़ा हो रहा है इस दुर्दशा के लिए देश स्वतंत्र नहीं कराया था हमारे बलिदानीयो की कुर्बानियां जो हुई क्या यही सब सोचकर उन्होंने अपनी शहादत दी थी आज हम जाती, धर्म, क्षेत्र, सम्प्रदाय, के नाम पर बंटवारा कर रहे हैं अपने राष्ट्र व समाज को विभाजन देश को फिर से आर्थिक सामाजिक रूप से गुलाम बना कर रख दिया है क्या यह सच नहीं है और इसके लिए हम सभी नागरिक व नोट के बदले वोट देने वाले लोग जिम्मेदार नहीं हैं जरा यह विचार अवश्य करें दूसरे की तरफ उंगली करने से पहले जरा जांच लें हमारे अपने ही हाथ में लगी अन्य उंगलियां किस तरह इशारा कर रही है

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