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चौधरी छोटूराम सेवा समिति खेड़ी कलां द्वारा सर चौधरी छोटू राम जी की 144 वी जयंती मनाई गई

Posted by : pramod goyal on : Monday, 24 November 2025 0 comments
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 फरीदाबाद ( ) 24 नवंबर। आज चौधरी छोटूराम सेवा समिति खेड़ी कलां द्वारा किसानों व मजदूरों के मसीहा रहबर ए आज़म दीनबंधु सर चौधरी छोटू राम जी की 144 वी जयंती गांव खेड़ी कलां के चौधरी छोटूराम सामुदायिक केंद्र में समिति के प्रधान सत्यपाल नरवत की अध्यक्षता में मनाई गई। जिसमें सर्वप्रथम रहबर ए आजम की प्रतिमा पर रिटायर्ड सूबेदार मेजर देशराज जी द्वारा माल्यार्पण किया गया। उसके बाद उपस्थित सभी गणमान्यों ने किसानों के मसीहा की प्रतिमा पर मालार्पण किया। किसानों के महानपुरुष की जयंती में छोटूराम सेवा समिति के महासचिव पवन कुमार,


उपप्रधान चंद्रवीर भारद्वाज, कोषाध्यक्ष अनिल कुमार, सक्रिय सदस्य श्यामवीर, अनूप, अमित नरवत एवं कुलदीप आदि ने भाग लिया। समाज कल्याण समिति के प्रधान कमल सिंह, इनेलो के किसान सेल के जिला प्रधान जितेंद्र नरवत, पत्रकार रामरतन, धर्मवीर, राजेंद्र सोलंकी, पूर्व सरपंच डॉक्टर गयाशीराम, प्रकाशचंद, चंद्रसिंह, जगदीश, मंगलीराम, रामकिशन, जगदीश नरवत, राजेश सोलंकी, देवीराम, सुभाष, सुखीराम, कृष्ण पहलवान, मोहनलाल, किशन सिंह, लिखीराम, धन्नू, गोविंदा आदि ने भाग लिया। महापुरुष की जयंती के शुभ अवसर पर समाज कल्याण समिति खेड़ी कलां के प्रधान कमल सिंह ने कहा कि आज हम चौधरी छोटूराम जी को उनके द्वारा किए गए किसान हित, मजदूर हित एवं अन्य समाज हित के कार्यों के कारण याद करते हैं। उनकी पूजा करते हैं आज के समय में भी हमें चौधरी छोटू राम जैसे मसीहा की आवश्यकता है। जो समाज में फैली बुराइयों, कुप्रथाओं, फिजूल खर्ची जैसे मृत्यु भोज, शादियों में डी.जे. आदि बजाना, लगन सगाई पर अधिक आदमी ले जाने का प्रचलन, युवाओं में नशा प्रचलन, एक गोत्र में विवाह, एक गांव के लड़का लड़की की शादी, लिव इन रिलेशनशिप में रहना आदि बुराइयों को दूर कर सकें। प्रत्येक समाज के लोग को आगे आकर पहल करनी चाहिए। इस मौके पर समिति के प्रधान सत्यपाल नरवत ने चौधरी छोटूराम जी की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया कि चौधरी छोटूराम का जन्म साधारण किसान परिवार में चौधरी सुखीराम जी के घर गांव गढ़ी सांपला में 24 नवंबर 1881 को हुआ। उन्होंने आठवीं कक्षा तक झज्जर से शिक्षा ग्रहण की। उसके बाद दिल्ली से ग्रेजुएशन और आगरा से वकालत की डिग्री प्राप्त की। छोटूराम जी पढ़ाई में होशियार थे और जो मन में ठान लिया उसे पूरा किया। वे अपने पिता के साथ साहूकार से पढ़ाई के लिए कर्जा लेने गए। साहूकार ने उनके पिताजी से उनके सामने पंखा करवाया और वहीं से बगैर कर्ज लिए वापस आ गए और उसके बाद में पढ़ाई करके राजनीति में भाग लेकर अपनी अलग यूनियनिस्ट पार्टी बनाकर चुनाव में जीतकर राजस्व मंत्री बनकर कर्जा मुक्ति एक्ट, भूमि एक्ट, दमदुपट्टा (दुधारू पशुओं की नीलामी पर रोक), मंडी एक्ट, श्रमिक एक्ट आदि अनेक जनहित के कानून पास कराए। भाखड़ा बांध बनाने का विचार भी छोटू राम जी का था। उन्होंने शिक्षा पर बहुत जोर दिया। वह अपने वेतन का एक तिहाई स्कूल में दान दिया करते थे। उनके शिक्षा में सारा योगदान सेठ छाजू राम का था कहते हैं कि सेठ छाजूराम न होता तो सर छोटूराम न होता। छोटूराम जी ने किसानों के लिए नारा दिया *ए भोले किस एक बोलना सीख ले और दूसरा दुश्मन को पहचान ले* आज हम सभी उनकी जयंती पर प्रण लेकर उनके बताए हुए मार्गो पर चले और जीवन में समाज हित के कार्य करने की प्रेरणा लें 9 जनवरी 1945 को चौधरी छोटूराम इस दुनिया को छोड़ कर अमर हो गए।

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