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आशा वर्कर्स यूनियन द्वारा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ फरीदाबाद से शुरू हुआ जागरूकता अभियान जत्था

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 4 September 2025 0 comments
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 फरीदाबाद,4 सितंबर।


आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा के कन्या भ्रूण ह

त्या के खिलाफ जागरूकता अभियान जत्था मुख्य शहरों एवं कस्बों में होते हुए 26 सितंबर को कुरूक्षेत्र में पहुंचेगा और वहां एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा। सभा के द्वारा जागरुकता अभियान के दौरान आए सभी सुझावों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा। आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा सीटू की राज्य प्रधान सुनीता,उप प्रधान सुधा के नेतृत्व में चला जत्था फरीदाबाद ने बीके चौक,पाली चौंक से शुरू होते इस जत्थे ने सेक्टर 22 ,शिव दुर्गा विहार, भीम बस्ती ,पल्ला सहित कई स्थानों पर सभाओं को संबोधित किया। सभाओं को आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा की राज्य अध्यक्ष सुनीता, उपप्रधान सुधा, सचिव प्रवेश , जिला प्रधान हेमलता, अनीता ,शाहीन परवीन ,नीलम पूजा,सीमा, सुजाता ,इंद्रावती, कुसुम लता चंद्रप्रभा,सुशीला ,रानी , जूली , चांदनी जिला कमेटी सीटू प्रदेश महासचिव जय भगवान, जिला प्रधान निरंतर पराशर आदि ने प्रमुख रूप से संबोधित किया। इन आयोजनों में स्वास्थ्य विभाग, एनएचएम के अधिकारी, सरपंचों और जन प्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों ने भी हिस्सा लिया व संबोधित किया। उन्होंने आशा यूनियन के प्रयास की सराहना की और अपने विचार व्यक्त करते हुए कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान में हर संभव सहयोग करने का संकल्प लिया। 

वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ सालों से हरियाणा में लिंगानुपात लगातार नीचे गिरता जा रहा है। हरियाणा में लंबे समय से लिंगानुपात कम रहने की समस्या रही है। 2015 से 2019 के बीच लिंगानुपात में थोड़ा सुधार हुआ था लेकिन दोबारा हरियाणा का लिंगानुपात लगातार नीचे जा रहा है जो काफ़ी चिंताजनक है। स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात में सुधार करने के लिए प्रयास कर रहा है जिसके तहत प्रदेश की आशा वर्कर्स और आंगनवाड़ी वर्कर्स को गर्भवती महिलाओं के लिए सहेली भी नियुक्त किया गया है। यूनियन नेताओं ने बताया कि लिंगानुपात में गिरावट का मसला तकनीकी नहीं है इससे विभिन्न सामाजिक आयाम जुड़े हुए हैं। लड़कियों की गैर बराबरी, उनके खिलाफ बढ़ती लगातार हिंसा, लड़कियों को कमतर दिखाने वाले रीति रिवाज और शादियों के भारी भरकम खर्च, दहेज  लड़कियां  पैदा न करने की परिस्थितियां तैयार करते हैं। इस बारे सरकार, विभागों ओर प्रशासन को काम करना चाहिए। सरकार ने भले ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था परंतु बेटियां बचें और वो पढ़ें इसके लिए पर्याप्त सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। 

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