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14 सितंबर को उपायुक्त कार्यालय के समक्ष होने वाले‌ प्रदर्शन में ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन भी भाग लेंगे

Posted by : pramod goyal on : Tuesday, 9 September 2025 0 comments
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 बल्लभगढ़ 9 सितंबर ‌- 


न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर ‌30 हजार रुपए ‌ प्रतिमाह संशोधित करने,  ‌ सभी मजदूरों के लिए आवास का प्रबंध करने, मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स रद्द करने, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने की ‌मांग को लेकर आगामी 14 सितंबर को जिला ‌ मुख्यालय के सामने उपायुक्त कार्यालय के समक्ष होने वाले‌ प्रदर्शन में ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन भी भाग लेंगे।‌ यह निर्णय आज मंगलवार को नाहर सिंह पार्क बल्लभगढ़ में संपन्न हुई बैठक में लिया गया। ‌ इस बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान देवी राम ने की जबकि संचालन जिला के वित्त सचिव दिनेश पाली ने किया। इस मौके पर सीटू के जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सीटू ही ‌ एकमात्र संगठन है। जो मजदूरों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष में रहता है। सीटू के ‌ मांग पर ही सरकार ने न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने के ‌ प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस बारे में सुझाव देने के लिए सरकार ने कमेटी का गठन किया। जिसमें अन्य चार मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ सीटू  भी शामिल है। इस कमेटी में उद्योग मालिकों की एसोसिएशन के भी प्रतिनिधि शामिल हैं। सीटू ने इस कमेटी की सभी बैठकों में 30 हजार  रुपए न्यूनतम वेतन( सैलरी) की मांग की है। यह मांग हमने खुद कानून व सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन तय करने के पैमानों के आधार पर गणना करते हुए तैयार की है। एक परिवार में पति- पत्नी, दो बच्चों के परिवार को चार यूनिट माना जाए। और माता-पिता में  कम  से कम एक को न्यूनतम वेतन निर्धारण में एक अतिरिक्त यूनिट के रूप में शामिल किया जाए। इसके महीने भर का खर्च इतना ही आएगा। आज कारखानों में‌  ‌ सबसे ज्यादा शोषण ठेका अप्रेंटिस कैजुअल व आउटसोर्स ट्रेनिज  आदि के नाम से काम करने वाले मजदूरों का है। इनकी संख्या भी रेगुलर मजदूरों से काफी ज्यादा है। लेकिन इन्हें यूनियन बनाने का ही अधिकार नहीं किया जा रहा है। इसके चलते रेगुलर मजदूरों तक की मोलभाव की क्षमता लगातार कम हो रही है। जिसका फायदा उद्योग मालिक और सरकार दोनों उठा रहे हैं। न्यूनतम वेतन में सरकार द्वारा घोषणा करना ही काफी नहीं है।  जिस तरह से बहुत सारे उद्योगों में न्यूनतम वेतन भी नहीं दिया जाता  है। बहुत सारे मजदूरों को ईएसआई और पीएफ में कवर नहीं किया जा रहा है। न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और उसे लागू करवाना भी एक बहुत बड़ा काम हो गया है। मजदूरों के संगठित प्रयासों के बिना यह संभव नहीं है। ‌ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में काम करने वाले दिल्ली के मजदूरों का ‌ न्यूनतम वेतन वेतन 18066 प्रतिमाह है।‌ जबकि हरियाणा के फरीदाबाद के मजदूरों को न्यूनतम वेतन 11258 मिलता है।  जो‌ दिल्ली की तुलना में ₹7000 कम है।‌ आज की बैठक में महेंद्र सिंह, ‌ राजू, ‌ धर्मेंद्र, ‌ ओम प्रकाश ने भी ‌ सभी ग्रामीण सफाई कर्मचारियों से 14 सितंबर के कार्यक्रम में बढ़कर भाग लेने का आवाहन किया।

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