//# Adsense Code Here #//
फरीदाबाद में बेटे ने 25 लाख रुपए के मुआवजे की चाहत में अपने जिंदा पिता की श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर दी। बड़े-बड़े पोस्टर छपवाकर गांव में लगवाए। ढोल-बाजे के साथ नाचते हुए पूरे गांव में यात्रा निकाली, लेकिन जब जिंदा पिता ने इसका वीडियो देखा तो वह हैरान रह गया।
पिता ने पहले अपने जिंदा होने की वीडियो बनाकर सरपंच को भेजी। इसके बाद मंगलवार को खुद गांव में पहुंचा और पंचायत करवाई। पंचायत ने बेटे का बहिष्कार कर दिया है।
पिता का आरोप है कि बेटा उसे जान से मारना चाहता है, इसलिए वह 9 महीने से घर से गायब था। अब बेटा कह रहा है- यह पिता को तलाशने का तरीका था।
- मामला फरीदाबाद के गांव पन्हेड़ा कलां का है। 3 अगस्त को स्वामी राजेंद्र देव महाराज नाम के व्यक्ति ने अपने 79 साल के जिंदा पिता लालचंद उर्फ लूला की श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इसके गांव में 50 बड़े-बड़े पोस्टर भी लगाए गए, जिसमें श्रद्धांजलि सभा का दिन, समय और स्थान लिखा गया था। गांव के मंदिरों में रोटियां बांटी गईं। ढोल-बाजे के साथ यात्रा निकाली।
- इस सभा को लेकर राजेंद्र की सफाई थी कि उसके पिता 9 महीने पहले घर से साइकिल पर गोवर्धन परिक्रमा के लिए गए थे, लेकिन वह गोवर्धन से बनारस चले गए। बनारस से वह महाकुंभ में चले गए। महाकुंभ में पहुंचने तक पिता से बात हो रही थी, लेकिन महाकुंभ में मची भगदड़ वाले दिन से बातचीत बंद हो गई।
- राजेंद्र ने बताया- इसके बाद महाकुंभ जाकर पिता की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। मुझे लगा कि पिता की भगदड़ में मौत हो गई है। इसके बाद मैं महाकुंभ से घर लौट आया। यहां लोगों के कहने पर मैंने पिता के लिए श्रद्धांजलि सभा रखी।
- वहीं, गांव में चर्चा है कि जब राजेंद्र के पिता घर से गायब थे तो वह लोगों से कहता था कि महाकुंभ में उसके पिता की मौत हो चुकी है। दरअसल, महाकुंभ के दौरान भगदड़ में कई लोगों की जान गई थी। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि जिन साधु या लोगों की जान गई है, उनके परिवारों को 25-25 लाख रुपए दिए जाएंगे।
- बेटे की इस करतूत का पता जब पिता लालचंद को लगा तो वह घर लौट आए। उन्होंने कहा- घर से जाने के बाद मैंने अपना नंबर बंद कर दिया था। केवल मेरे एक रिश्तेदार के पास नया नंबर था। जब उस रिश्तेदार ने बेटे की ओर से रखी गई श्रद्धांजलि सभा का वीडियो देखा तो मुझे जानकारी दी। इसके बाद गांव के सरपंच को फोन कर मैंने गांव में आने की सूचना दी। इसके बाद मैं रिश्तेदारों के साथ गांव में पहुंचा हूं।
रविवार को राजेंद्र ढोल-बाजे के साथ लालचंद की यात्रा गांव में निकाल रहा था। 21 किलो आटे का दिया जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही थी। गांव के मंदिर पर राजेंद्र रोटिया बांट रहा था। इस दौरान राजेंद्र नाचते हुए भी दिखा। इस बीच सरपंच धर्मवीर ने गांव के कुछ लोगों को साथ लेकर मंदिर पर जाकर श्रद्धांजलि सभा रुकवाई, और लालचंद की ओर से जिंदा होने की जानकारी देने वाला वीडियो सभी को दिखाया। सरपंच ने कहा कि लालचंद अभी जिंदा है, तो उसकी श्रद्धांजलि यात्रा कैसे निकल सकती है?


No comments :