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ऑल जीकेएन ड्राइव शॉफ्ट्स कर्मचारी यूनियन संघ ने मनाया 34 वां स्थापना दिवस

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 20 July 2025 0 comments
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 फरीदाबाद 20 जुलाई।


सेक्टर 24 स्थित ऑल जेकेएन ड्रा

इव शॉफ्ट्स कर्मचारी यूनियन संघ ने रविवार को हर्षोल्लास के साथ 34वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर कंपनी के मेन गेट पर आम सभा का आयोजन किया। सभा में सभी फाउंडर मेंबर व पदाधिकारियों की गौरवमई मौजूदगी ने यूनियन के सभी सदस्यों में जोश भरने का काम किया। यूनियन ने सभी का फूल-मालाओं व शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। यह दृश्य देखते ही बन रहा था। सभा की अध्यक्षता मजदूर संगठन सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर ने की। आम सभा में यूनियन के प्रधान गुलशन चौहान, महासचिव नरेंद्र सोलंकी, कोषाध्यक्ष औम प्रकाश सिंह अन्य सभी पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद थे। इस स्थापना समारोह में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सीटू की राज्य कमेटी की नेता सुधा, फरीदाबाद कामगार यूनियन व भारत गेयर मजदूर यूनियन के प्रधान रवि गुलिया व महासचिव प्रेम चंद भी पहुंचे। यूनियन नेताओं ने समारोह में शामिल उक्त मेहमानों का भी गर्मजोशी के साथ फूल-मालाओं व शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया।

आम सभा को संबोधित करते हुए सीटू के जिला प्रधान एवं मजदूरों के प्रेरणास्रोत, निडर और ईमानदारी की मिसाल कॉमरेड निरंतर पाराशर ने कहा कि जीकेएन कंपनी मैनेजमेंट अपने मजदूरों के वेलफेयर और मजदूर,कंपनी प्रबंधन के लक्ष्य का परस्पर ध्यान रखते हैं। इसीलिए कंपनी बिना किसी अवरोध के अच्छे से चल पा रही। उन्होंने कहा कि प्रबंधन व मजदूर यूनियनों की आपसी समझदारी एवं सहयोग से ही कंपनियों चली है। उन्होंने कहा कि मुनाफाखोरी की हवा के कारण ही श्रमिक विवाद होते हैं और जिसके कारण दोनों की पक्षों का नुक़सान होता है। उन्होंने कहा कि 34 साल पहले जब कंपनी के गेट पर यूनियन का झंडा लगाया तो वह अन्य मजदूर नेताओं के साथ मौजूद थे। उन्होंने अभी हाल ही में मैनेजमेंट के साथ किए शानदार समझोते के लिए भी वर्तमान नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनियन बड़ी ईमानदारी एवं मेहनत से काम कर रही है। उन्होंने  नेतृत्व की स्थापना दिवस पर फाउंडर मेंबर को आमंत्रित कर सम्मानित करने की भी सराहना की।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि मजदूरों ने संधर्षों के बल पर देश की आजादी से पहले और बाद में  मजदूरों की भलाई के लिए 40 से ज्यादा श्रम कानूनों को बनवाया गया। लेकिन केन्द्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए चार लेबर कोड्स बना दिए गए हैं। जिसके कारण मालिकों को मजदूरों की छंटनी करने,काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने, सामूहिक सौदेबाजी के कानून अधिकार से बचकर निकलने का रास्ता देने का काम किया है। लेबर कोड्स लागू होने पर यूनियन बनाने और उसका पंजीकरण करवाना काफी कठिन का होगा। हड़ताल को गैर कानूनी ठहराने और मजदूरों के खिलाफ जेल व भारी भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है। उन्होंने सभी मजदूरों एवं नेताओं से अपनी एकता को मजबूत कर सरकार की मजदूर एवं कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने का आह्वान किया।

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