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फरीदाबाद।
जहां एक तरफ पूरे देश में निजामुद्दीन प्रकरण के बाद मुस्लिम समुदाय को घृणा की दृष्टि से देखा जा रहा है वहीं फरीदाबाद में मुस्लिम समुदाय के कुछ व्यक्ति इंसानियत का चोला ओढ़कर जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाने का काम कर रहे हैं समाजसेवी यह व्यक्ति किसी से भी उसकी जाति व धर्म पूछकर उन्हें राशन की सामग्री नहीं देते बल्कि यह सिर्फ भूखे और जरूरतमंदों के घर-घर तक संपूर्ण राशन की सामग्री पहुंचा रहे हैं,, जिसमें आटा, चावल, दाल, तेल, मसाले सब्जियां सब कुछ सम्मिलित है देश के समुदाय विशेष से जुड़े लोगों को इंसानियत का संदेश देने वाले हाजी अली हसन का कहना है कि वह लॉक डाउन के पहले दिन से ही समाज सेवा में जुटे हुए हैं और वह किसी से भी उसकी जाति और धर्म नहीं पहुंचते हैं सिर्फ उसकी जरूरत देखी जाती है उनकी पूरी टीम अलग-अलग जगहों को चिन्हित करके लोगों तक राशन पहुंचा रही है साथ ही उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का पालन करें लॉक डाउन की पालना करें । यह महामारी किसी का जाति धर्म देखकर नहीं आती है चाहे वह तबलीगी जमात से जुड़ा हो या फिर किसी और धर्म से ।
जहां एक तरफ पूरे देश में निजामुद्दीन प्रकरण के बाद मुस्लिम समुदाय को घृणा की दृष्टि से देखा जा रहा है वहीं फरीदाबाद में मुस्लिम समुदाय के कुछ व्यक्ति इंसानियत का चोला ओढ़कर जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाने का काम कर रहे हैं समाजसेवी यह व्यक्ति किसी से भी उसकी जाति व धर्म पूछकर उन्हें राशन की सामग्री नहीं देते बल्कि यह सिर्फ भूखे और जरूरतमंदों के घर-घर तक संपूर्ण राशन की सामग्री पहुंचा रहे हैं,, जिसमें आटा, चावल, दाल, तेल, मसाले सब्जियां सब कुछ सम्मिलित है देश के समुदाय विशेष से जुड़े लोगों को इंसानियत का संदेश देने वाले हाजी अली हसन का कहना है कि वह लॉक डाउन के पहले दिन से ही समाज सेवा में जुटे हुए हैं और वह किसी से भी उसकी जाति और धर्म नहीं पहुंचते हैं सिर्फ उसकी जरूरत देखी जाती है उनकी पूरी टीम अलग-अलग जगहों को चिन्हित करके लोगों तक राशन पहुंचा रही है साथ ही उन्होंने संदेश देते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का पालन करें लॉक डाउन की पालना करें । यह महामारी किसी का जाति धर्म देखकर नहीं आती है चाहे वह तबलीगी जमात से जुड़ा हो या फिर किसी और धर्म से ।

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