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फरीदाबाद। पूरे हरियाणा में वोट डाले जा चुके है और सभी दलों के प्रत्याशी व राजनैतिक दल अपनी-अपनी जीत के लिए चुनावी गणित लगा रहे कि उन्हे कहां से कितने वोट व सीटे मिल सकती है। यह तो 24 अक्टूबर को ही ईवीएम का पिटारा खुलने के बाद पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि इस बार हरियाणा में चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होंगें। जिसमें सरकार के बड़े-बड़े मंत्री भी हार का मुंह देख सकते है। हालांकि विभिन्न सर्वे एजेंसियां हरियाणा में फिर से भाजपा की वापसी का दावा ही नहीं कर रही है, बल्कि विपक्ष का सूपडा साफ दिखाकर भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलना भी बता रही है। अब सवाल यह उठता है कि ये एजेंसियां कहा और किससे पूछ कर सर्वे करती है। क्योंकि वोटर तो आमतौर पर अपने वोट का खुलासा करता नहीं है। और न ही किसी से फोन व अन्य माध्यम से सम्र्पक किया जाता है,तो फिर यह सर्वे कैसे और किस आधार पर सीटों का बटवारा दलों कर देता है। काफी लोगों से बात की गई तो सभी कहना है कि उनसे तो कभी किसी सर्वे टीम ने पूछा ही नहीं, फिर सर्वे कब और कैसे हो गया। मतदान का कम प्रतिशत बता रहा है कि हरियाणा के लोगों में सत्तासीन पार्टी के प्रति अब उतना मोह नहीं है, जितना था। लोकसभा चुनाव देश के नेतृत्व के लिए होता है। ऐसे में लोगों के पास मोदी के अलावा कोई विकल्प था ही नहीं, क्योंकि कांग्रेस में ऐसा कोई कद्दावर नेता नहीं दिखाई दे रहा था, जो देश की बागडोर संभाल सके। वैसे भी कमजोर संगठन और आपसी फूट कांग्रेस की सबसे बड़ी हार का कारण रही। लेकिन यह विधानसभा चुनाव है, जहां जनप्रतिनिधियों का जनता से सीधा संवाद रहता है और उनके रोजमर्रा के काम भी उनसे ही पड़ते है। जिसपर वर्तमान विधायक या तो खरा नहीं उतर पायें, या फिर उनसे किनारा करते रहे। इस बार लोगों ने पार्टी से अधिक उम्मीदवारों पर अपनी मुहर लगाई है, जो उनके दुख-सुख मे काम आ सकें।

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