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गांव नेकपुर में रहस्यमय रोग फैलने से लगभग 16 राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत हो चुकी है। मोरों की मौत मात्र 1 सप्ताह के दौरान हुई है । शिकायत करने के बाद भी वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी व डॉक्टरों की टीम गांव में नहीं पहुंची है। मोरों
की लगातार हो रही मौत से ग्रामीण परेशान हैं।
बीमार मोरों का यही इलाज फरीदाबाद के जिला पशुपालन अस्पताल में डॉक्टर से कर रहे हैं। अब तक पशुपालन विभाग और वन्य प्राणी जीव विभाग इस मामले में पूरी तरह गंभीर नजर नहीं आ रहा था। लेकिन मीडिया की टीम जैसे ही मामले को कवरेज करने पहुंची तो दोनों ही विभाग हरकत में आ गए और सीधे नेकपुर गांव में पहुंच गए। हमने देखा मोर ऊपर उड़ता है और फिर से जमीन पर गिर जाता है तथा पेड़ों पर बैठा मोर अचानक जमीन पर गिरता है। गिरने के बाद मोर अंधा हो जाता है और कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो जाती है। गुरुवार रात से यह क्रम शुरू हुआ और शुक्रवार शाम तक 16 मोरों की मौत हो चुकी है। कई मोर बीमार हैं, ग्रामीण उनका उपचार कर रहे हैं। इनको कौन सा रोग लगा है, इस बारे में किसी को पता नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि इसकी सूचना वन्य प्राणी विभाग व खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी को दी है। वन्य प्राणी विभाग से दो कर्मचारी गांव में आए थे और मरे हुए मोरों को गड्ढा खोदकर दबाकर चले गए, पर किसी अधिकारी ने गांव में आना उचित नहीं समझा है। गांव नेकपुर में हो रही मोरों की मौत के बारे में सूचना नहीं मिली है। इस बारे में वन्य प्राणी विभाग व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को मुआयना करने के लिए गांव में भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद ही जानकारी दी जा सकती है। वहीं पशुपालन विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ नीलम आर्य की माने तो उनके पास कल इसकी सूचना पहुंची थी। आज उनके विभाग की डॉक्टरों की टीम नेकपुर पहुंची और टीम ने मृत मोर और बीमार मोरो को अपने साथ इलाज के लिए फरीदाबाद स्थित जिला पशु चिकित्सालय में ले आए। नीलम आर्य की माने तो वायरल के कारण इन लोगों की मौत हुई होगी। फिर भी बीमारी के कारणों का पता लगाया जा रहा है और अमृत मोरो को हिसार स्थित मुख्यालय में पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मालूम चल पाएगा कि आखिर मोरों की मौत किस कारण से हुई है। जब तक बीमार मोरों का इलाज कर रहे हैं।

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