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फरीदाबाद। एक्स सैनिक कालोनी सोसायटी के प्रधान पद का चुनाव राजनैतिक अखाडा व खरीद-फरोख्त का केन्द्र बनकर रह गया है। आज होने वाले चुनाव को कालोनी के निवासियों के भारी विरोध के कारण स्थगित कर दिया गया। अब दोनो पक्ष पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप की शरण में पंहुच गए है। जबकि इससे पहले प्रधान पद के दावेदार एक ग्रुप के लोग मंत्री विपुल गोयल और सीपीएम सीमा त्रीखा का नाम लेकर अपनी दावेदारी को न केवल पुख्ता कर रहे थे, बल्कि सोयायटी के निर्वाचित निदेशकों के साथ खरीद फरोख्त का खेल भी खेल रहे थे। अब यह चुनाव अगले शुक्रवार को होगा।
सैनिक कालोनी सोसायटी पर कब्जा करके उसे अपने मन मुताबिक चलाने की कवायद शुरू से रही है। इस कालोनी के प्रधान पद पर अभी तक वहीं व्यक्ति काबिज होता आया है, जिसे पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप का आर्शिवाद प्राप्त हो। लेकिन सत्ता बदलते ही अब इस पर निदेशक चुने गए राकेश धुन्ना की नजर है और वे स्वयं को मंत्री विपुल गोयल और सीपीएस सीमा त्रीखा का नजदीकी भी निदेशकों बता रहे है। सैनिक कालोनी प्रधान पद का आज चुनाव होना था, लेकिन अचनानक चार निदेशकों के गायब होने और फिर अचानक एक कार से उनके पर्दापण होने पर कालोनी के लोग भडक गए और काफी ज्दोजहद के बाद वे फिर से पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप के पास पंहुचे। जिसके बाद तय किया गया कि अब चुनाव अगले शुक्रवार को होगा।
सैनिक कालोनी के प्रधान पद में ऐसा क्या है कि लोग लाखों रूपए खर्च करके भी इस पद को अपनाना चाहते है। इससे तो साफ जाहिर है कि यह पद कमाई का मोटा साधन है, जिस पर न केवल प्रधान बनने का खवाब देखने वाले बल्कि सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष्यिों की पैनी नजर है।
सैनिक कालोनी सोसायटी पर कब्जा करके उसे अपने मन मुताबिक चलाने की कवायद शुरू से रही है। इस कालोनी के प्रधान पद पर अभी तक वहीं व्यक्ति काबिज होता आया है, जिसे पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप का आर्शिवाद प्राप्त हो। लेकिन सत्ता बदलते ही अब इस पर निदेशक चुने गए राकेश धुन्ना की नजर है और वे स्वयं को मंत्री विपुल गोयल और सीपीएस सीमा त्रीखा का नजदीकी भी निदेशकों बता रहे है। सैनिक कालोनी प्रधान पद का आज चुनाव होना था, लेकिन अचनानक चार निदेशकों के गायब होने और फिर अचानक एक कार से उनके पर्दापण होने पर कालोनी के लोग भडक गए और काफी ज्दोजहद के बाद वे फिर से पूर्व मंत्री महेन्द्र प्रताप के पास पंहुचे। जिसके बाद तय किया गया कि अब चुनाव अगले शुक्रवार को होगा।
सैनिक कालोनी के प्रधान पद में ऐसा क्या है कि लोग लाखों रूपए खर्च करके भी इस पद को अपनाना चाहते है। इससे तो साफ जाहिर है कि यह पद कमाई का मोटा साधन है, जिस पर न केवल प्रधान बनने का खवाब देखने वाले बल्कि सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष्यिों की पैनी नजर है।

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