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अपनी ही बेटी आरुषि की हत्या
के मामले में दोषी ठहराए गए तलवार दंपति इन दिनों गाजियाबाद जेल में खुद
को ढाढ़स देने के लिए कैदियों की सेवा कर रहे हैं. तलवार दंपति मिलकर
गाजियाबाद जेल में कैदियों की दांतों की समस्या का हल करते हैं. ये दोनों जेल में बकायदा एक डेंटल क्लिनिक चलाते हैं.
एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के अनुसार जेल अधिकारियों ने यह माना कि जेल के भीतर डेंटल फैसिलिटी गाजियाबाद जिला अस्पताल से ज्यादा अच्छी
है. उन्होंने बताया कि तलवार दंपति के जेल आने से पहले एक प्राइवेट
संस्था अपनी मोबाइल डेंटल क्लिनिक चलाती थी. लेकिन अब जेल के अंदर ही स्थाई
तौर
पर एक डेंटल क्लिनिक खोल दिया गया है. डॉ. राजेश तलवार की देख-रेख में
यह क्लिनिक चलाया जाता है और सर्जरी या महिला कैदियों की इलाज के समय डॉ.
नूपुर तलवार अपने पति का साथ देती हैं.
कैदियों की दंत चिकित्सा के अलावा तलवार दंपति ने खुद को व्यस्त रखने और डिप्रेशन से बचने के लिए आर्ट ऑफ लिविंग
में भी इनरोल कर रखा है. दोनों पति-पत्नी जेल में कई सारी किताबें भी
मंगाते हैं और कैदियों की चिकित्सा सेवा से समय बचने के बाद पढ़ते रहते
हैं.
आपको बता दें कि 16 मई 2008 को तलवार दंपति की बेटी आरुषि
का मृत शरीर इनके ही घर में पाया गया था. एक दिन बाद इनके नौकर हेमराज की
डेड बॉडी भी घर के छत पर मिली थी. स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने नवंबर 2013 में
तलवार दंपति को आरुषि-हेमराज हत्या कांड का दोषी पाया था और सजा सुनाई थी.

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