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'गुर्जर, शब्द एक विशेष जाति का ही सूचक नहीं है, बल्कि न्याय व सच्चाई का प्रतीक है: कृष्णपाल गुर्जर

Posted by : pramod goyal on : Friday, 15 May 2015 0 comments
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 केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री  कृष्णपाल गुर्जर ने आज महाराष्ट्र के नासिक में नासिक गुर्जर महासभा द्वारा अखिल भारतीय गुर्जर एकता अभियान के अन्तर्गत आयोजित गुर्जर सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में पधारकर सम्बोधित किया।
    श्री गुर्जर ने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं कि 'गुर्जरÓ शब्द एक विशेष जाति का ही सूचक नहीं है, बल्कि न्याय व सच्चाई का प्रतीक है।  यह समाज सर्वधर्म समभाव की एक मिसाल है। इसमें हिन्दू, मुस्लिम और सिख धर्मों को मानने वाले लोग शामिल हैं। गुर्जर मुख्यत: हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर एवं महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फैले हुए हैं।  गुर्जर जाति का इतिहास राश्ट्रीय संस्कृति और स्वतंत्रता के लिए वीरतापूर्वक संघर्ष और बलिदान का इतिहास है। दसवीं और ग्यारहवीं सदी में गुर्जर प्रतिहार राजाओं ने उत्तर -पश्चिमी भारत पर दूर-दूर तक राज किया है। उनके शासनकाल में बहुत शांति रही और बहुत प्रगति हुई। उन्होंने आर्थिक प्रगति के साथ-साथ विभिन्न कलाओं के विकास पर भी बहुत ध्यान दिया।
    श्री गुर्जर ने कहा कि गुर्जर जाति ने उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ी। पाकिस्तान में पंजाब का जो हिस्सा गया है, उसमें एक जिले का नाम गुजरांवाला है। भारत और पाकिस्तान में हजारों गांव ऐसे हैं, जो गुर्जरों के गांव हैं और सैंकड़ों गांव और शहर ऐसे हैं, जहां अब गुर्जर नहीं बसते लेकिन अब तक उनका नाम गुर्जरों के नाम पर ही चला आ रहा है। भारत में गुर्जरों के नाम पर गुजरात प्रान्त का नाम है। इस कौम ने ऐसे महान सपूतों और वीरांगनाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने इतिहास के एक लम्बे दौर में बड़ी-बड़ी कुर्बानियां दीं, लेकिन अपनी मान-मर्यादा और देश के गौरव पर कभी आंच नहीं आने दी।गुर्जर समाज ने महान शूरवीर, नि:स्वार्थ समाजसेवी, समाज सुधारक, कुशल प्रशासक तथा दूरदर्शी राजनेता दिये हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर एक अमिट छाप छोड़ी है।
    उन्होंने कहा कि इस समाज में उत्पन्न गायत्री माता जो ब्रह्मा जी की अर्धांगनि थी,नंद बाबा जो भगवान श्रीकृष्ण के पालक पोषक थे और सवाई भोज जैसे वीर पैदा हुए, जिन्होंने अपने वचनों के लिए रानी जयंती को अपना शीश काटकर दे दिया। इनके अलावा पन्ना धाय जैसी वीरांगना पैदा हुई जिसने अपने बेटे चंदन का बलिदान देकर उदय सिंह के प्राण बचाये। विजय सिंह जैसे क्रांतिकारी नेता भी इसी समाज में हुए। लौहपुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल न केवल गुर्जर समाज के बल्कि पूरे राष्ट्र के कोहिनूर थे। उनका नाम लेते ही हर भारतवासी का सीना गर्व से फूला नहीं समाता।    श्री गुर्जर ने कहा कि इस समाज ने सदा ही अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया, राष्ट्र के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानियां दीं। भारत की आज़ादी और आज़ादी के बाद राष्ट्र की आन, बान और शान की रक्षा के लिए कुर्बानी देने वालों में इस समाज का अग्रणी स्थान है। 1857 की जनक्रांति में इस कौम के वीरों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। अंग्रेजों की नाक में नकेल कसने वाले गुर्जरों को अंग्रेजों ने क्रीमनल ट्राइब कह कर पुकारा था और बागी घोषित कर दिया है।   
    उन्होंने कहा कि बड़े दु:ख की बात है कि गुर्जर कौम का इतिहास इतना गौरवशाली होने के बावजूद भी इसकी जानकारी लोगों को नहीं है। अब तक इस कौम के इतिहास पर जितना शोध कार्य होना चाहिए था, उतना नहीं हो पाया है।

इसके लिए गुर्जर बुद्धिजीवियों को आगे आना चाहिए ताकि हमारी भावी पीढ़ी अपने स्वर्णिम इतिहास से प्रेरणा ले सके।
    श्री गुर्जर ने कहा कि मेरा मानना है कि संगठित एवं प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए भावी पीढ़ी को शिक्षित करना निहायत ही जरूरी है। गुर्जर समाज में लड़कियों की शिक्षा की ओर कम ध्यान दिया जाता है। हमें लड़कियों को भी शिक्षित करना चाहिए। 
    उन्होंने कहा कि आज गुर्जर समाज के सामने अनेक समस्याएं हैं, जिनका समाधान केवल संगठित होकर ही किया जा सकता है। अत: हमें यह याद रखना चाहिए कि सम्मान, शक्ति और अधिकार स्वयं नहीं मिल जाते बल्कि उनकी प्राप्ति के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। व्यक्तिगत स्वार्थ के स्थान पर समाज के हित को वरीयता देनी पड़ती है। सबसे बड़ी बात यह है कि पूरे समाज का एक स्वर और एक आवाज होनी चाहिए। हमारा संगठन इतना मज़बूत, इतना सुदृढ़ और इतना व्यापक होना चाहिए कि एक आवाज मात्र पर सम्पूर्ण समाज के भाई जाग खड़े हों। हमें अपने उच्च नैतिक मूल्यों और परम्पराओं को कायम रखते हुए समय की धारा के अनुरूप अपने-आपको ढालना होगा, तभी हम और हमारा गुर्जर समाज आगे बढ़ सकेंगे।
  

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