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गुर्जर समाज के वीर क्रांतिकारियों की याद किया गया

Posted by : pramod goyal on : Monday, 11 May 2015 0 comments
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 अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा द्वारा सेक्टर-16 स्थित गुर्जर भवन में आयोजित वीर गुर्जर महासम्मेलन के दूसरे दिन देश को स्वतंत्र कराने में अपने प्राणों की आहूति देने वाले गुर्जर समाज के वीर क्रांतिकारियों की याद में हवन किया गया और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। इस मौके पर 20 प्रदेशों से आए महासभा के कार्यकर्ता ने भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर योगी आदित्यानाथ गुर्जर,योगी महाराज,अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर बैंसला,राष्ट्रीय संरक्षक नरेन्द्र गुर्जर डेडा,राष्ट्रीय प्रचारक नरेन्द्र बैंसला,हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल तंवर मुख्य रूप से उपस्थित थे। इस मौके पर राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने कहा कि 10 मई 1857 को अमर शहीद धन सिंह गुर्जर(चपराणा) ने मेरठ में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजाया था। इस दिन को राष्ट्रीय क्रांति दिवस के रूप में मनाते है। धन सिंह गुर्जर के पूर्वज फरीदाबाद के मेवला महाराजपुर से ही जाकर मेरठ के गांव पांचाली में बस गए थे। उन्होनें कहा कि धनसिंह गुर्जर ने देशभक्त लोगों के साथ मिलकर अंग्रेजी सरकार की चूलें हिला दी थी और उन्हें बहुत नुक्सान पहुंचाया था। अनुराग गुजर्र ने कहा कि क्योकि 1857 की क्रांति में जनता की सहभागिता की शुरूआत धनसिंह गुर्जर के नेतृत्व में मेरठ की जनता ने की थी। अत: ये ही 1857 की क्रांति के जनक कहे जा सकते है। इस अवसर पर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि जल्दी ही केन्द्र सरकार से यह मांग रखी जाएगी कि अंग्रेजों के विरूद्व लडऩे वाले भारत माता के वीर सपूतों की याद में एक स्मारक ग्रेटर नोएडा के नलपाड़ा गौतमबुद्व नगर के आसपास बनाया जाए ताकि आज की युवा पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके और उनके आर्दशों को अपने जीवन में ढाल सकें। उन्होनें कहा कि दिल्ली का इंडिया गेट अंग्रजों ने बनवाया था और यह अंग्रेजों की निशानी है। इस मौके पर प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल तंवर ने कहा कि समाज के विजयसिंह पथिक ने कई बड़े बड़े क्रांतिकारियों को बम बनाने की शिक्षा दी थी जिस कारण अंग्रेजों ने उनके खिलाफ 1920 में एक लाख रूपये का ईनाम रखा था। उन्होनें कहा कि समाज के ऐसे कितने ही वीर क्रांतिकारी थे जिन्होनें अंग्रेज सरकार से लोहा लिया और देश के लिए मर मिटे। अनिल तंवर ने कहा कि उनका मुख्य उददेश्य 1857 की क्रांति में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले वीर क्रांतिकारियों को सम्मान दिलाना है जिसके वे असली हकदार है। इस अवसर पर महासभा द्वारा गुर्जर समाज के प्रतिभावान बच्चों को व देश के कोने कोने से आए महासभा के कार्यकताओं को सम्मानित कर उनका हौंसला बढ़ाया गया। इस मौके पर तेजा,विनोद तंवर,सूबेदार तंवर,अनिल बैंसला,देवीलाल,सौरभ तंवर,गौरव तंवर,अमित कपासिया,डा.शैलेन्द्र,डा.अजय भाटी,कपिल भड़ाना,अखिल बैंसला,बिटटू आदि लोग उपस्थित थे।

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