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लखनऊ, 3 नवंबर।
अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के साथ छेड़छाड़ करने की जमीन तैयार कर रही है। आठवें केंद्रीय वेतन आयोग के टर्म्स ऑफ रेफरेंस में पुरानी पेंशन को 'बिना अंशदान वाली पेंशन योजना' बताते हुए उसके वित्तीय बोझ का आकलन करने तथा पेंशन लाभों की समीक्षा में राजकोषीय अनुशासन और आर्थिक स्थिति को आधार बनाने पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन कोई खैरात नहीं, बल्कि कर्मचारी के वेतन का स्थगित हिस्सा है। सरकार आर्थिक स्थिति का बहाना बनाकर कर्मचारियों के पेंशन अधिकारों को कमजोर करना चाहती है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसका जवाब 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली राष्ट्रीय आक्रोश रैली में दिया जाएगा।
श्री लांबा मंगलवार को लखनऊ के प्रेरणा सदन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। वे जौनपुर और भदोही के मंडलीय सम्मेलनों में भाग लेने के बाद फॉरेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश की राज्य कमेटी की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमल अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जुलाई से देय डीए और दीपावली से पहले मिलने वाला बोनस तक जारी नहीं किया है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। यूपी से हजारों कर्मचारी रैली में भाग लेंगे। महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने आउटसोर्स कर्मियों के पारिश्रमिक में सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग की। अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष एसपी सिंह ने कहा कि हजारों पेंशनर्स भी रैली में शामिल होकर पेंशन वैलिडेशन एक्ट-2025 रद्द करने की मांग उठाएंगे। रैली के प्रभारी एवं समन्वयक जेपी पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश से दस हजार
से अधिक कर्मचारी रैली में भाग लेंगे। सभी जिलों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। प्रेस कांफ्रेंस में उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के कोषाध्यक्ष राम भजन मौर्य व सह कोषाध्यक्ष एवं लखनऊ जनपद अध्यक्ष अफीफ सिद्दीकी भी मौजूद थे।
श्री लांबा ने बताया कि 12 दिसंबर की रैली में पुरानी पेंशन बहाली, पीएफआरडीए एक्ट तथा एनपीएस-यूपीएस रद्द करने, आठवें वेतन आयोग में 3.8 फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर पांच प्रतिशत करने, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40 हजार रुपये निर्धारित करने, मूल वेतन का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम पांच हजार रुपये मासिक अंतरिम राहत देने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, बकाया 18 प्रतिशत डीए/डीआर जारी करने, निजीकरण पर रोक, सरकारी विभागों में पदों की कटौती बंद करने, आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट तथा सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ पुरानी पेंशन के वित्तीय बोझ का आकलन कराने की बात कर रही है, दूसरी तरफ पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को देश की आर्थिक स्थिति तथा राजकोषीय अनुशासन से जोड़ रही है। यह सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कर्मचारी अपने अर्जित पेंशन अधिकारों पर किसी भी हमले का एकजुट होकर प्रतिरोध करेंगे।
श्री लांबा मंगलवार को लखनऊ के प्रेरणा सदन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। वे जौनपुर और भदोही के मंडलीय सम्मेलनों में भाग लेने के बाद फॉरेस्ट मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश की राज्य कमेटी की बैठक में शामिल होने पहुंचे थे।
उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कमल अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जुलाई से देय डीए और दीपावली से पहले मिलने वाला बोनस तक जारी नहीं किया है। इससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। यूपी से हजारों कर्मचारी रैली में भाग लेंगे। महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार सिंह ने आउटसोर्स कर्मियों के पारिश्रमिक में सरकार द्वारा की गई बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए समान काम-समान वेतन और नियमितीकरण की मांग की। अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष एसपी सिंह ने कहा कि हजारों पेंशनर्स भी रैली में शामिल होकर पेंशन वैलिडेशन एक्ट-2025 रद्द करने की मांग उठाएंगे। रैली के प्रभारी एवं समन्वयक जेपी पांडेय ने बताया कि उत्तर प्रदेश से दस हजार
से अधिक कर्मचारी रैली में भाग लेंगे। सभी जिलों में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। प्रेस कांफ्रेंस में उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के कोषाध्यक्ष राम भजन मौर्य व सह कोषाध्यक्ष एवं लखनऊ जनपद अध्यक्ष अफीफ सिद्दीकी भी मौजूद थे।
श्री लांबा ने बताया कि 12 दिसंबर की रैली में पुरानी पेंशन बहाली, पीएफआरडीए एक्ट तथा एनपीएस-यूपीएस रद्द करने, आठवें वेतन आयोग में 3.8 फिटमेंट फैक्टर, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर पांच प्रतिशत करने, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 40 हजार रुपये निर्धारित करने, मूल वेतन का 20 प्रतिशत तथा न्यूनतम पांच हजार रुपये मासिक अंतरिम राहत देने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती, बकाया 18 प्रतिशत डीए/डीआर जारी करने, निजीकरण पर रोक, सरकारी विभागों में पदों की कटौती बंद करने, आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट तथा सभी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग प्रमुखता से उठाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ पुरानी पेंशन के वित्तीय बोझ का आकलन कराने की बात कर रही है, दूसरी तरफ पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों को देश की आर्थिक स्थिति तथा राजकोषीय अनुशासन से जोड़ रही है। यह सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कर्मचारी अपने अर्जित पेंशन अधिकारों पर किसी भी हमले का एकजुट होकर प्रतिरोध करेंगे।

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