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CAG रिपोर्ट में हरियाणा सरकार की 'ई-गवर्नेंस' की खुली पोल

Posted by : pramod goyal on : Wednesday, 2 September 2026 0 comments
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 चंडीगढ़


: हरियाणा सरकार की सूचना प्रणालियों की कार्यप्रणाली को लेकर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। 2026 की प्रतिवेदन संख्या 3 में ई-प्रोक्योरमेंट परियोजना तथा आबकारी विभाग की लाइसेंस प्रबंधन, शराब उत्पादन और वितरण प्रणाली की सूचना प्रणाली का परीक्षण किया गया। रिपोर्ट को संविधान के अनुच्छेद 151 के तहत विधानसभा के पटल पर रखने के लिए राज्यपाल को प्रस्तुत करने हेतु तैयार किया गया था और इसे 12 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को भेजा गया।


कैग ने दोनों डिजिटल व्यवस्थाओं में तकनीकी क्षमता के साथ-साथ प्रक्रियागत नियंत्रण, निगरानी, डेटा प्रबंधन, वित्तीय सत्यापन, प्रशिक्षण और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच की। रिपोर्ट के निष्कर्ष बताते हैं कि कई प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण गतिविधियां अभी भी मैनुअल या ऑफलाइन तरीके से संचालित होती रहीं।

ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली का उद्देश्य सरकारी खरीद में प्रतिस्पर्धा, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। लेखापरीक्षा में पाया गया कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के साथ अपेक्षित करार का निष्पादन नहीं हुआ, जबकि परियोजना निगरानी इकाई (पीएमयू) भी प्रभावी ढंग से काम नहीं कर सकी।
कुछ महत्वपूर्ण मॉड्यूल और कार्यक्षमताएं उपलब्ध नहीं थीं। वहीं, कई गतिविधियां या तो नहीं की गईं अथवा पोर्टल से बाहर ऑफलाइन तरीके से पूरी की गईं। उपयोगकर्ताओं को पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिलने से भी प्रणाली के प्रभावी इस्तेमाल पर असर पड़ा।

निविदा प्रक्रिया में कई स्तरों पर कमियां
कैग के अनुसार निविदा प्रक्रिया में भी अनेक प्रक्रियागत कमजोरियां सामने आईं। निविदाओं का पर्याप्त प्रचार नहीं हुआ, बोली लगाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और जहां आवश्यक था, वहां निविदा-सह-नीलामी की कार्यक्षमता का इस्तेमाल नहीं किया गया।

पुनः आमंत्रित निविदाओं और मूल निविदाओं के बीच लिंक का अभाव तथा निविदा प्रक्रिया के लिए डुप्लीकेट यूजर तैयार किए जाने जैसे मामले भी सामने आए।
सिस्टम में समय विस्तार, बोली खुली रखने की अवधि, शिकायत निवारण की समय सीमा और शुद्धिपत्र जारी करने जैसे महत्वपूर्ण कारोबारी नियमों को पूरी तरह मैप नहीं किया गया था।

बोली प्रक्रिया में नियंत्रण कमजोर
लेखापरीक्षा में ऐसे उदाहरण भी सामने आए, जिनमें मिलीभगतपूर्ण बोली या बोली में हेरफेर की संभावना के संकेत मिले। एक ही आईपी एड्रेस अथवा खरीद संस्था के कंप्यूटरों से बहुत कम अंतराल में अनेक बोलियां जमा किए जाने के मामले पाए गए।
कैग ने ऐसे मामलों को निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता और प्रतिस्पर्धात्मकता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना है। साथ ही, कम अवधि के लिए निविदा विस्तार, अलग-अलग तारीखों पर बोलियों को डिक्रिप्ट करना और बोलियों को निर्धारित क्रम से अलग खोलने जैसी स्थितियां भी सामने आईं।

पोर्टल पर जानकारी अपडेट नहीं होने से निगरानी प्रभावित कैग ने ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली में डेटा की विश्वसनीयता और प्रबंधन सूचना प्रणाली से संबंधित कमियों को भी रेखांकित किया। कई मामलों में निविदा चरण अपडेट नहीं हुए, मूल्यांकन सारांश अपलोड नहीं किए गए और यूजर डेटा तथा प्रोफाइल प्रबंधन में विसंगतियां मिलीं।
पोर्टल पर आवंटन मूल्य और निविदा स्थिति से संबंधित सूचनाओं में भी अंतर पाया गया। इससे अधिकारियों के लिए पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रभावी निगरानी करना चुनौतीपूर्ण हुआ।

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