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ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था से राजस्व सेवाओं में आएगी पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता - विपुल गोयल

Posted by : pramod goyal on : Thursday, 27 August 2026 0 comments
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 हरियाणा सरकार राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी कड़ी में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू की जा रही है। इसका उद्देश्य केवल इंतकाल की प्रक्रिया को डिजिटल बनाना नहीं, बल्कि पूरी राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना, अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और आम नागरिकों को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है।



कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन के बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया को स्पष्ट और निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने की व्यवस्था की जा रही है। रजिस्ट्रेशन के बाद पहले 4 दिन तक म्यूटेशन संबंधित पटवारी के लॉगिन में रहेगी और आवश्यक कार्रवाई के लिए पटवारी को 4 दिन का समय दिया जाएगा। यदि इस अवधि में कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो 5वें दिन म्यूटेशन स्वतः कानूनगो के लॉगिन में चली जाएगी। कानूनगो को आवश्यक कार्रवाई के लिए 2 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद 7वें दिन म्यूटेशन स्वतः सीआरओ के लॉगिन में चली जाएगी, जहां आवश्यक कार्रवाई के लिए 4 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है। यदि निर्धारित समय में आवश्यक कार्रवाई नहीं होती है, तो 11वें दिन म्यूटेशन स्वतः जमाबंदी में शामिल हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि म्यूटेशन किसी एक स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित न रहे। प्रत्येक स्तर पर कार्रवाई के लिए निश्चित समय-सीमा होने से जवाबदेही तय होगी और नागरिकों को अपनी सेवा के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता के साथ-साथ कार्यप्रणाली में तेजी और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल ने कहा कि नागरिकों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा एक विशेष ऑनलाइन पेज अथवा पोर्टल भी शुरू किया जाएगा, जहां निर्धारित समय-सीमा में म्यूटेशन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर नागरिक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। नागरिक अपनी म्यूटेशन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकेंगे और संबंधित विभाग अथवा अधिकारी द्वारा 10 दिनों के भीतर मामले पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि नियमों के अनुसार म्यूटेशन की जा सकती है, तो नागरिक को उसकी म्यूटेशन की प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, यदि किसी वैधानिक अथवा अन्य निर्धारित कारण से म्यूटेशन नहीं की जा सकती, तो संबंधित सीआरओ द्वारा स्पष्ट और कारणयुक्त स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाएगा। इसमें यह बताया जाएगा कि म्यूटेशन क्यों नहीं की जा सकती, किस नियम या कारण के आधार पर मामला स्वीकार नहीं किया गया तथा आवश्यकता होने पर आगे की प्रक्रिया क्या होगी। इससे नागरिकों को केवल मौखिक रूप से “इंतकाल नहीं हो सकता” कहकर वापस नहीं भेजा जाएगा, बल्कि उन्हें लिखित और स्पष्ट निर्णय प्राप्त होगा।

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