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हरियाणा में अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने के लिए नई नीति लागू

Posted by : pramod goyal on : Sunday, 19 July 2026 0 comments
pramod goyal
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 हरियाणा सरकार ने राज्य की अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित करने के लिए नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत अब


ऐसी औद्योगिक कॉलोनियों को  सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिफिशिएंट एरिया घोषित किया जा सकेगा।

इससे इन क्षेत्रों में सड़क, पेगजल, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नई नीति के अनुसार किसी औद्योगिक कॉलोनी को नियमित कराने के लिए उसका कम से कम 10 एकड़ के लगातार क्षेत्र में फैला होना और उसमें न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयों का होना जरूरी होगा। इसके अलावा केवल वे इकाइयों इस योजना का लाभउठा सकेंगी जो 3 अक्तूबर 2025 से पहले स्थापित की गई हों।

सरकार ने वर्ष 2022 की नीति और 2023 में जारी राहत संबंधी निर्देशों में संशोधन करते हुए यह नई व्यवस्था लागू की है। पहले यह नीति औद्योगिक कॉलोनियों पर लागू नहीं होती थी लेकिन 2025 में कानून में संशोधन के बाद अब इन्हें भी इसके दायरे में शामिल कर लिया गया है।

सरकार का उद्देश्य इन क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों और उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध कराना है। स्वामित्व के प्रमाण के लिए 3 अक्तूबर 2025 से पहले पंजीकृत बिक्री विलेख या एग्रीमेंट टू सेल मान्य होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने पिछले बजट में इसकी घोषणा की थी। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के एसीएस (अतिरिक्त मुख्य सचिव) अनुराग अग्रवाल की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।


छह महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य
सरकार ने संशोधित नीति जारी होने की तारीख से छह महीने के भीतर आवेदन करना अनिवार्य किया है। आवेदन के साथ शजरा प्लान, ले-आउट प्लान, ड्रोन एवं सेटेलाइट इमेज, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, बिजली बिल, फैक्ट्री लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति, फायर एनओसी सहित 15 प्रकार के दस्तावेज जमा करने होंगे। नई व्यवस्था में जिलास्तरीय जांच समिति को भी मजबूत किया गया है। इसमें अब जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है।

औद्योगिक कॉलोनियों से जुड़े मामलों में समिति की सिफारिशें उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक के माध्यम से आगे भेजी जाएं‌गी। सरकार का मानना है कि इस नीति से राज्य के अनधिकृत औद्योगिक क्लस्टरों में संचालित हजारों औद्योगिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलेगी। साथ ही इन क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं का विस्तार होगा जिससे उद्योगों के विकास के साथ ही श्रमिकों और स्थानीय लोगों का जीवन स्तर भी बेहतर हो सकेगा।

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