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फरीदाबाद 17 जुलाई सीटू जिला कमेटी ने शिवाजी नगर नजदीक मछली मार्केट सैक्टर 22 में बरसों पहले बने घरों को अवैध निर्माण बताकर खाली करने के नोटिस देने की कड़े शब्दों में निंदा की। सीटू के महासचिव जय भगवान और जिला सचिव, वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि यहां लगभग 800 मकान है। हजारों लोग यहां पर रहते हैं। यहां बसे लोगों को नागरिक सुविधाएं देने के बजाय घरों को खाली कराने का नोटिस दिया जा रहा है। यह नोटिस भारत सरकार के आवासीय और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत भूमि तथा विकास कार्यालय के अभियंता अधिकारी के द्वारा 8 जु
लाई को जारी किया गया है। जबकि यहां के लोगों को इस नोटिस की जानकारी 14 जुलाई को मिली। इसमें कहा गया है। कि यह जमीन भारत सरकार के अधीन है। इसका प्रबंधन भूमि एवं विकास कार्यालय भारत सरकार करती है। नोटिस में निर्देश दिए गए हैं। कि 15 दिनों के भीतर उक्त भूमि को तत्काल और अनिवार्य रूप से खाली करें। इसके साथ-साथ भूमि पर सभी अवैध निर्माण, अस्थाई ढांचे अथवा रखे गए सामान को निर्धारित अवधि के भीतर स्वयं हटा लें ।यदि 15 दिनों के भीतर भूमि खाली नहीं की गई। तो 26 जुलाई से भूमि एवं विकास कार्यालय इस अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू करेगा। उन्होंने अतिक्रमण हटाने तथा तोड़ फोड़ की कार्रवाई के दौरान किसी भी सामान, सामग्री, संरचना अथवा अन्य संपत्ति को होने वाले किसी भी प्रकार की क्षति के लिए विभाग को उत्तरदाई नहीं माना जाएगा। इसका उल्लेख किया है। उन्होंने इस पत्र में जिन लोगों के मकान और दुकानों को तोड़ा जाएगा उनके पुनर्वास और मुआवजा देने का उल्लेख नहीं किया है। जबकि यह लोग इस भूमि में पिछले 45 वर्षों से रह रहे हैं। पिछली सरकारों ने इन्हें अलग-अलग स्थानों से लाक यहां पर बसाया था। यह आश्वासन भी दिया था कि अब आपके घरों को कोई तोड़ने नहीं आएगा। अब केंद्र की सरकार इन घरों को ध्वस्त करने के आदेश दे रही है। जो पूर्ण रूप से अनुचित है। सीटू ने बेदखली के नोटिस को गंभीरता से लिया है। इसका विरोध किया जाएगा। यहां पर सभा करते हुए सीटू के उपाध्यक्ष शिव प्रसाद, जिला कोषाध्यक्ष सुधा ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी घर को नहीं तोड़ने देंगे लोगों को संगठित करके दिल्ली के संकल्प भवन में जाकर भारत सरकार को मांगों का ज्ञापन सोपा जाएगा। सीटू के जिला प्रधान निरंतर पाराशर जिला उपाध्यक्ष हेमलता पूजा गुप्ता, नीलम जोशी ने भी इस कार्रवाई को पूर्ण रूप से अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि इस कॉलोनी में बेहद ही गरीब और निर्धन लोग रहते हैं। जो रोज मजदूरी करके अपना जीवन चलाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां पर भारत सरकार की प्रेस की भूमि में बड़े-बड़े लोगों ने मकान और दुकानों और फैक्ट्रियां बना रखी हैं।उन्हें सरकार खाली करने के नोटिस नहीं देती सरकार का आदेश केवल गरीबों पर ही चलता है। बड़े पूंजी पत्तियों और सेठ साहूकारों को सरकार कुछ भी नहीं रहती है। इसके विरोध में आंदोलन को तेज किया जाएगा।

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