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फरीदाबाद,22 जून।
नेहरू कालोनी और अन्य कालोनियों पर बुल्डोजर चलाने, गैर कानूनी तोड़-फोड़ के खिलाफ एवं इसके दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करवाने तथा तोड़े गए घरों का मुआवजा दिलवाने व विस्थापित लोगों के पुनर्वास के लिए सोमवार को हजारों पीड़ित लोगों ने उपायुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। उल्लेखनीय है कि नेहरू कालोनी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले 15 जून से नगर निगम कमिश्नर फरीदाबाद के कार्यालय के सामने धरना चल रहा है। इसी कड़ी में सभी कालोनियों में व्यापक अभियान चलाते हुए आज रोष प्रदर्शन की कार्यवाही की गई। रोष प्रदर्शन को प्रमुख रूप से सीटू राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सांसद तपन सेन, प्रदेश महासचिव जय भगवान, राज्य सचिव सुधा, जिला प्रधान निरंतर पाराशर, सचिव वीरेंद्र डंगवाल, जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष सविता, महासचिव ऊषा सरोहा, कमेटी सदस्य सबिता मलिक, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व नगर पालिका कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री, जिला प्रधान करतार सिंह,सचिव बलबीर बालगुहेर, संघर्ष समिति के नेता बिजेंद्र सिंह, पूनम, राजेंद्र, बलबीर, देवकी आदि ने संबोधित किया। प्रदर्शन से पूर्व पीड़ितों ने ओपन एयर थियेटर में सभा का आयोजन किया। जिसमें नेहरू कालौनी सहित अन्य करीब दस कालोनियों के हजारों लोगों ने भाग लिया और एक स्वर में नेहरू कालौनी में की गई तोड़फोड़ और अन्य कालोनियों में नोटिस जारी करने की प्रशासन की घोर निन्दा की। मुख्यमंत्री ने संबोधित ज्ञापन डीसी की गैर मौजूदगी में एसडीएम को सौंपा गया। सर्व सम्मति से पारित प्रस्ताव में इतनी भीषण गर्मी में नेहरू कालौनी की बिजली व पानी की सप्लाई बंद करने के कृत्य की घोर निन्दा की और तूरंत बहाली की मांग की। फैसले के अनुसार मांगे पूरी होने पर नगर निगम मुख्यालय पर शांतिपूर्ण धरना जारी रहेगा।
उक्त नेताओं ने रोष प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि फरीदाबाद नगर निगम व जिला प्रशासन द्वारा 70 साल से भी अधिक समय से बसी नेहरू कालोनी में सैंकड़ों घरों और धार्मिक उपासना स्थलों पर बुल्डोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया है। यह कार्यवाही 29 व 30 मई 2026 की रात को उस समय की गई, जब रात को लोग अपने घरों में सो रहे थे। जिन घरों पर बुल्डोजर चला उनके मालिकों को घर खाली करने के लिए पहले कोई नोटिस तक नहीं दिए गए। हजारों मकान मालिकों को मौखिक रूप से धमकी देकर घर खाली करने के अवैध आदेश दिए जा रहे हैं। कालोनी में रहने वाले लोगों के राशन कार्ड हैं, आधार कार्ड हैं, बिजली के मीटर हैं, वोटर कार्ड हैं, फैमिली आईडी हैं। वर्षों से इन परिवारों की कई पीढ़ियां यहां रह रही हैं। उन्होंने कहा कि नेहरू कालोनी मेें 29-30 मई 2026 की रात को विध्वंस की यह कार्यवाही आरंभ की गई। लेकिन इन सन्दर्भ में जगह खाली करवाने का नोटिस नगर निगम फरीदाबाद द्वारा 2 जून 2026 को जारी किया गया। उक्त नोटिस लिखा गया कि मैट्रो रेलवे इन्र्फास्टक्चर डवल्पमैंट के लिए जगह खाली करवानी है। पत्र में बाकयदा स्पष्ट लिखा गया है कि इसके लिए पुलिया की और से 120 फीट से लेकर मस्जिद की ओर 160 फीट के ऐरिया को खाली करना है। इस क्षेत्र में जो भी आवासीय या अन्य परिसर आते हैं, उन्हें अगले एक सप्ताह में खाली कर दिया जाए। इस जगह का प्रयोग मैट्रो स्टेशन प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा। इसी नोटिस में यह भी स्पष्ट है कि उक्त कार्यवाही भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एंव पुनःस्थापन कानून-2013 के अनुसार की जाएगी। इससे प्रभावित होने वाले परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा व उन्हें अन्य स्थान पर बसाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह नोटिस मकानों व अन्य बसावटों को तोड़ने से पहले क्यों नहीं दिया गया ? दूसरा इस बसावट के केवल कुछ हिस्से को खाली करवाने बारे लिखा है। फिर पूरी कालोनी को खाली करवाने व ध्वस्त करने के मौखिक आदेश देकर लोगों को घर खाली करने पर क्यों मजबूर किया जा रहा है व घर क्यों तोड़े जा रहे हैं ? नेहरू कालोनी में पानी व बिजली की सप्लाई बंद क्यों की गई है? यही नहीं भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लगाकर लोगों के इकट्ठा होने पर भी प्रतिबंध है, ऐसा क्यों ?
संगठन नेताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार यदि किसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण करती है तो उसके लिए भी एक तय प्रक्रिया है। इसके लिए समय रहते नोटिस भेजे जाते हैं, मुआवजे की राशि तय होती है तथा तमाम स्टेक होल्डर्स के साथ वार्ता करते हुए एक सहमति तक पंहुचा जाता है। आवासीय बस्तियां या कालोनियां आती हैं तो वहां मकान मालिकों को मुआवजा मिलता है व उनके परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है। इसके बाद ही तोडफोड की कार्यवाही आगे बढ़ती है। लेकिन फरीदाबाद में नेहरू कालोनी पर जो बुल्डोजर चलाकर मकानों व धार्मिक स्थलों को ध्वस्त किया जा रहा है वहां इस प्रकार के कानूनी नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। आखिरकार ऐसा क्यों किया जा रहा है ? यही नहीं इसी प्रकार से दर्जनों अन्य कालोनियों में भी इसी प्रकार की धमकियां लोगों को दी जा रही है व उन्हें घर खाली करवाने का डर बैठाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सताधारी पार्टी के किन्हीं खास नेताओं, प्रापर्टी डिलरों को यह बेशकीमती जमीन उपलब्ध करवाने के लिए की जा रही हैं। शायद इसीलिए नेहरू कालोनी जैसी बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है और यह लाखों लोगों को विस्थापित करने की योजना का हिस्सा है। लाखों लोंगों को उनके घरोें से बेदखल किया जा रहा हैं। हजारों परिवारों की खून-पसीने की कमाई से खडे किए गए आशियानों को तबाह किया जा रहा है। लोगों को कई दिनों तक कालोनी में बंधक जैसी स्थिति में बनाकर रखा गया है, बिजली, पानी तक काट दिया गया। सैंकड़ों परविार सड़क किनारे खुले आसमान व टैंटों में रहने पर मजबूर हैं। स्कूली बच्चों के अभी स्कूल खुलने वाले हैं, आखिर वे कहां रहकर अपनी पढ़ाई करेंगे।


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