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भोजपुर मुठभेड़ विवाद : निष्पक्ष जांच एवं साक्ष्य संरक्षण की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे एडवोकेट डॉ. मोहन तिवारी

Posted by : pramod goyal on : Monday, 22 June 2026 0 comments
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 फरीदाबाद। सेक्टर 12 फरीदाबाद निवासी एडवोकेट एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस मुठभेड़ में हुई मृत्यु के मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं पटना हाइकोर्ट को जनहित प्रतिनिधित्व भेजकर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।

     एडवोकेट डॉ. तिवारी द्वारा भेजे गए प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि उक्त घटना को लेकर मृतक के परिजनों तथा पुलिस प्रशासन के अलग-अलग दावे सामने आए हैं, जिसके कारण घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर जनमानस में अनेक प्रश्न उत्पन्न हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता, जनचर्चा तथा व्यापक जनहित को देखते हुए इसकी निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच अत्यंत आवश्यक है।

     प्रतिनिधित्व में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक को जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। ऐसी परिस्थितियों में जब किसी व्यक्ति की मृत्यु पुलिस कार्रवाई के दौरान विवादित परिस्थितियों में होती है, तब स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच न केवल कानूनी आवश्यकता है, बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य हो जाती है।

    एडवोकेट डॉ. तिवारी ने अपने प्रतिनिधित्व में घटना से संबंधित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों, जैसे वीडियो रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया सामग्री, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक एवं बैलिस्टिक रिपोर्ट तथा अन्य अभिलेखों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही उन्होंने मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराए जाने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था को दोषी ठहराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सत्य तथ्य निष्पक्ष जांच के माध्यम से सामने आएं तथा न्याय के सिद्धांतों एवं मानवाधिकारों की रक्षा हो सके।

    एडवोकेट डॉ. मोहन तिवारी ने बताया कि वे विगत कई वर्षों से जनहित, विधिक जागरूकता एवं सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सक्रिय रूप से कार्य करते रहे हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि संबंधित प्राधिकारियों द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक एवं उचित कदम उठाए जाएंगे, जिससे न्याय व्यवस्था में आमजन का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।


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