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फरीदाबाद 29 मई -
सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) ने किया हेल्थ एंड लाइफ केयर लिमिटेड के श्रमिकों के आंदोलन का समर्थन। आज शुक्रवार को सीटू ने सेक्टर 59 के प्लॉट नंबर एक और दो स्थित फैक्ट्री में पहुंच कर न्यूनतम वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे मजदूरों के आंदोलन को पूर्ण सहयोग देने का ऐलान किया। इस वेतन वृद्धि को लेकर सीटू के द्वारा छपवाए गए हैंड बिल भी यहां पर वितरित किए गए। सीटू जिला सचिव वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने बताया कि यहां पर बड़ी संख्या में पुरुष और महिला श्रमिक काम करते हैं। इन श्रमिकों को हरियाणा सरकार के द्वारा 9 अप्रैल को बढ़ाया गया वेतन नहीं मिल रहा है। श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने 11 मई को भी कंपनी प्रबंधन के सामने कम वेतन मिलने पर अपना विरोध दर्ज कराया था। लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। श्रमिकों के अनुसार यहां पर एक हजार श्रमिक हैं। जिसमें से केवल 100 श्रमिक कंपनी के रोल पर हैं। बांकी 900 ठेकेदार के अधीन काम करते हैं। ठेकेदार श्रमिकों को डबल ओवरटाइम नहीं देता है। उनका शोषण किया जा रहा है। उन्हें बोनस भी नहीं दिया जाता है। किसी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा कि पुराने और नए श्रमिकों को एक जैसा ही वेतन वितरित किया गया है।जबकि सरकार ने कुशल श्रमिक को 15220 रुपए और अर्ध कुशल श्रमिक को 16780 रुपए, और कुशल और उच्च कुशल श्रमिक को 18500 प्रति माह वेतन देने का आदेश दिया था। कंपनी प्रबंधक श्रम विभाग के आदेशों की परी पालना नहीं कर रहे हैं। इसका उल्लंघन हो रहा है। जबकि पहले उप श्रम आयुक्त ने फरीदाबाद में स्थित सभी कारखाने के मालिकों को न्यूनतम वेतन देने के आदेश दिए थे। इस फैक्ट्री के श्रमिक वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर 11 मई से संघर्ष कर रहे हैं । श्रम विभाग इस मामले पर अनभिज्ञ बना हुआ है। कोई भी अधिकारी यहां पर आकर श्रमिकों से नहीं मिलता है। मैनेजमेंट श्रमिकों को गुमराह कर रही है। उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। सीटू ने सभी श्रमिकों को कंपनी के रोल पर लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि श्रमिकों की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। सीटू नेताओं ने बताया कि पुलिस बातचीत करवाने की बजाय श्रमिकों को गेट से हटाने के लिए दबाव बनाती है। कल यहां पर हल्का-फुल्का लाठी चार्ज भी किया गया। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने श्रम विभाग से इसमें तत्काल हस्तक्षेप करके श्रमिकों को न्याय देने की मांग की।

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